कोलकाता
नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व वर्धमान जिले के कटवा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राज्य की राजनीति पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल अब परिवर्तन के लिए तैयार है और राज्य की महान विरासत को मौजूदा सरकार ने पीछे धकेल दिया है। पीएम ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने विकास के बजाय पिछड़ेपन को बढ़ावा दिया है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने हाल ही में जारी किए गए पार्टी के घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें जनता को छह बड़ी गारंटियां दी गई हैं, जिनके लिए स्पष्ट रोडमैप भी तैयार किया गया है। मोदी ने दावा किया कि उनकी सरकार “भय के माहौल” को खत्म कर “भरोसे का वातावरण” बनाएगी।
रैली के दौरान पीएम मोदी ने राज्य में लागू नहीं की गई केंद्र सरकार की योजनाओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं तुरंत लागू की जाएंगी, जिससे लाखों गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज मिल सकेगा। साथ ही उन्होंने किसानों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का भी वादा किया।
प्रधानमंत्री ने राज्य में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में लोगों को भय के माहौल में जीने के लिए मजबूर किया गया है और बीजेपी की सरकार बनने पर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सिंडिकेट और अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
पीएम मोदी ने रैली के बाद मुर्शिदाबाद हिंसा में मारे गए चंदन दास के परिवार से मिलने की भी बात कही। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इधर, असम के श्रीभूमि जिले के करीमगंज (उत्तर) विधानसभा क्षेत्र में भी आज दोबारा मतदान कराया जा रहा है। 9 अप्रैल को भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच विवाद के बाद चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान का आदेश दिया था। सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। चुनावी माहौल के बीच देश के विभिन्न राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सभी दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।


