तीसरी हार तय कहकर चुनावी रण में भरी हुंकार
गुवाहाटी| असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर नरेंद्र मोदी बुधवार को राज्य के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने धेमाजी जिले के गोगामुख और विश्वनाथ जिले के बेहाली में दो बड़ी चुनावी जनसभाओं को संबोधित कर भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया। सुबह करीब 11 बजे गोगामुख में आयोजित पहली जनसभा में प्रधानमंत्री ने भारी भीड़ को संबोधित करते हुए इसे भाजपा-एनडीए की संभावित तीसरी जीत का संकेत बताया और कहा कि जनता का उत्साह साफ दर्शाता है कि असम में फिर से डबल इंजन सरकार बनने जा रही है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी रनोज पेगू और नबा कुमार डोले के लिए समर्थन मांगा और राज्य में पिछले वर्षों में हुए विकास कार्यों को जनता के सामने रखा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह चुनाव केवल सरकार बनाने का नहीं, बल्कि “विकसित असम और विकसित भारत” के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी की तीसरी हार तय है और उसके नेता केवल सत्ता और परिवारवाद की राजनीति करते रहे हैं। उन्होंने Sarbananda Sonowal और Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में हुए पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल को सुशासन और विकास का उदाहरण बताया।
रैली से पहले प्रधानमंत्री Dibrugarh पहुंचे, जहां उन्होंने चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं से मुलाकात की और उनके साथ संवाद किया। इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि “चाय असम की आत्मा है” और यहां की चाय विश्वभर में अपनी पहचान रखती है। इसके बाद उन्होंने अपनी सभाओं में राज्य के विकास के लिए विस्तृत रोडमैप भी प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक 22 लाख परिवारों को पक्के मकान दिए जा चुके हैं और आने वाले समय में 15 लाख और परिवारों को आवास देने की योजना है। शिक्षा के क्षेत्र में बालवाड़ी से लेकर स्नातकोत्तर तक मुफ्त शिक्षा देने का वादा किया गया है, वहीं महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत लाखों महिलाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि ‘ओरुनोदोई’ योजना का विस्तार कर अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाई जाएगी।
बाढ़ की समस्या को लेकर प्रधानमंत्री ने बताया कि राज्य में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से ‘बाढ़ मुक्त असम मिशन’ चलाया जा रहा है, जिसके तहत आधुनिक तटबंधों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले असम हिंसा और अशांति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब हजारों युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा को अपनाया है, जो राज्य में शांति और स्थिरता का संकेत है।
कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब 11 लाख किसानों को 730 करोड़ रुपये से अधिक का क्लेम दिया जा चुका है। साथ ही उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब असम की पहचान केवल चाय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य सेमीकंडक्टर निर्माण का भी बड़ा केंद्र बनेगा, जिससे आधुनिक तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद राज्य के बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि पहले जहां असम में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 14 हो चुकी है और 10 नए कॉलेज निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र नदी पर पुल निर्माण को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने कम समय में अधिक विकास कार्य किए हैं।
प्रधानमंत्री के इन कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता व राज्य सरकार के मंत्री भी मंच पर मौजूद रहे। दोपहर 1 बजे विश्वनाथ जिले के बेहाली में आयोजित दूसरी जनसभा में भी प्रधानमंत्री ने पार्टी उम्मीदवार पल्लव लोचन दास के समर्थन में जनता से वोट देने की अपील की और असम के तेज़ विकास का भरोसा दिलाया।
चुनाव से पहले चाय बागान में उतरे पीएम मोदी, ‘असम की आत्मा’ बताकर साधा जनसंपर्क
नई दिल्ली
असम विधानसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्य के डिब्रूगढ़ स्थित एक चाय बागान का दौरा कर चुनावी माहौल के बीच सीधे जनता से जुड़ने का प्रयास किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने चाय की पत्तियां तोड़ीं, बागान में काम करने वाले श्रमिकों से बातचीत की और उनके साथ सेल्फी लेकर आत्मीयता का संदेश दिया।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने असम की पहचान को रेखांकित करते हुए कहा कि “चाय असम की आत्मा है” और यहां की चाय विश्वभर में अपनी खास पहचान रखती है। उन्होंने चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं से भी संवाद किया और उनके कार्य व जीवन से जुड़े अनुभवों को जाना। इस मुलाकात को उन्होंने बेहद यादगार बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तस्वीरें साझा कीं।
प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सभी राजनीतिक दल जनसंपर्क में जुटे हुए हैं। ऐसे में चाय बागान में पहुंचकर श्रमिकों के साथ समय बिताना और उनकी जीवनशैली को करीब से समझना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे जहां एक ओर स्थानीय लोगों से जुड़ाव मजबूत करने का संदेश गया, वहीं दूसरी ओर असम की पारंपरिक पहचान और संस्कृति को भी राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने का प्रयास नजर आया।


