नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों के विदाई सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता और जनसेवा का सिलसिला निरंतर चलता रहता है। उन्होंने निवर्तमान सांसदों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका अनुभव लोकतंत्र को मजबूत करने में हमेशा उपयोगी रहेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राज्यसभा एक “ओपन यूनिवर्सिटी” की तरह है, जहां हर दिन नए अनुभव और सीखने के अवसर मिलते हैं। उन्होंने कहा कि सदन में विभिन्न विषयों पर होने वाली चर्चाएं लोकतंत्र की आत्मा हैं और हर सदस्य का योगदान महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विदाई जैसे अवसर पर सभी दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर एक भाव से अपने साथियों के योगदान को स्वीकार करते हैं।
इस अवसर पर राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों के संसदीय जीवन और योगदान को रेखांकित किया। कई सीटों पर नए सदस्यों का निर्विरोध निर्वाचन भी हो चुका है, जिससे सदन की नई संरचना तैयार हो रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ सदस्य पुनः सदन में लौट सकते हैं, जबकि अन्य अपने अनुभव का उपयोग सामाजिक जीवन में करेंगे। उन्होंने कहा कि जो सदस्य अब वापस नहीं आएंगे, उनका योगदान भी देश के लिए हमेशा मूल्यवान रहेगा।
वरिष्ठ नेताओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने एच.डी. देवगौड़ा, मल्लिकार्जुन खरगे और शरद पवार का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा संसदीय सेवा को समर्पित किया है और नए सांसदों को उनसे सीख लेनी चाहिए।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हरिवंश जी ने सदन की कार्यवाही को संतुलित और शांतिपूर्ण ढंग से संचालित किया तथा अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि सभी जनप्रतिनिधि दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करें और अपने अनुभव साझा करें। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं से प्रेरणा लेने और संसद की गरिमा बनाए रखने का आह्वान किया।
राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता, लोकतंत्र में अनुभव की भूमिका अहम : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी


