यरूशलम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्राइल दौरे का दूसरा दिन ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षणों से भरपूर रहा। सुबह उन्होंने होलोकॉस्ट के पीड़ितों को समर्पित विश्वप्रसिद्ध स्मारक याद वाशेम पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने नरसंहार में जान गंवाने वाले लाखों निर्दोष लोगों को नमन करते हुए मानवता, शांति और सहअस्तित्व का संदेश दिया।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी में नाजी शासन और तानाशाह एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में यहूदियों के खिलाफ चलाए गए अमानवीय अभियान में लगभग 60 लाख लोगों की हत्या कर दी गई थी। इतिहास के इस भीषण नरसंहार को ‘होलोकॉस्ट’ के नाम से जाना जाता है। उसी त्रासदी की स्मृति को सहेजने के लिए यरूशलम में ‘याद वाशेम’ स्मारक की स्थापना की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने स्मारक परिसर में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी और आगंतुक पुस्तिका में शांति का संदेश भी लिखा।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इस्राइल की राजधानी यरूशलम में आयोजित एक उच्चस्तरीय टेक्नोलॉजी एवं नवाचार प्रदर्शनी का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ इस्राइल के प्रधानमंत्री *बेंजामिन नेतन्याहू* भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि तकनीक और साइबर सुरक्षा से जुड़े नवीनतम समाधानों का अवलोकन किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न तकनीकी उद्यमियों से बातचीत करते हुए उन्हें भारत में निवेश और साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी प्रदर्शनी के अनुभव साझा किए।

प्रधानमंत्री मोदी को इस्राइल की संसद ‘नेसेट’ के स्पीकर पदक से सम्मानित किए जाने पर देश में राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में प्रसन्नता व्यक्त की गई। रक्षा मंत्री *राजनाथ सिंह* ने सोशल मीडिया पर बधाई संदेश जारी करते हुए कहा कि यह सम्मान भारत और इस्राइल के बीच गहरे विश्वास, आपसी सम्मान और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।

भारत में इस्राइल के राजदूत *रूवेन अजार* ने प्रधानमंत्री की यात्रा को अत्यंत सफल और प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने व्यापक प्रभाव डाला और आतंकवाद के विरुद्ध उनकी ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति को स्पष्ट रूप से सामने रखा। राजदूत के अनुसार, हालिया समझौतों से दोनों देशों के बीच उन्नत एवं संवेदनशील तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को ठोस ढांचा मिला है, जो अब क्रियान्वयन के चरण में प्रवेश करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत-इस्राइल मित्रता को सांस्कृतिक आयाम देते हुए कहा कि यदि दोनों देशों की दोस्ती पर कोई बॉलीवुड फिल्म बने, तो वह निश्चित ही सुपरहिट होगी। उन्होंने वर्ष 2018 की अपनी भारत यात्रा को याद करते हुए कहा कि इस्राइल को भारतीय सिनेमा से विशेष लगाव है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में दोनों देशों के बीच फिल्म सह-निर्माण समझौते को मंजूरी दी गई थी। इस समझौते के तहत संयुक्त रूप से निर्मित फिल्मों को दोनों देशों में राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त होता है, जिससे फिल्म निर्माताओं को वित्तपोषण, तकनीकी सहयोग और वितरण के क्षेत्र में व्यापक अवसर मिलते हैं। उस दौरान आयोजित ‘शालोम बॉलीवुड’ कार्यक्रम में नेतन्याहू ने हिंदी फिल्म जगत के कई कलाकारों से भेंट भी की थी और इस्राइल में शूटिंग का निमंत्रण दिया था।

दौरे के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब सामने आया जब प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू एक ही कार में बैठकर प्रदर्शनी स्थल की ओर रवाना हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में लिखा कि नेसेट में अपने भाषण के बाद वे और उनके इस्राइली समकक्ष तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी देखने जा रहे हैं।

इससे पहले नेतन्याहू ने हिंदी में एक संदेश साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनकर अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी को आश्चर्यचकित कर दिया।

दौरे के दूसरे दिन दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में ड्रोन और अन्य उन्नत प्रणालियों की खरीद सहित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बन सकती है। लगभग नौ वर्षों के अंतराल के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह राजकीय यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नई दिशा और गति देने वाली मानी जा रही है।

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