नई दिल्ली। देश की प्रशासनिक संरचना में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे रायसीना हिल स्थित नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ तथा कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का औपचारिक उद्घाटन कर दिया। वर्ष 1931 में इसी दिन नई दिल्ली को आधुनिक भारत की राजधानी के रूप में उद्घाटित किया गया था, ऐसे में 13 फरवरी एक बार फिर ऐतिहासिक महत्व के साथ दर्ज हो गई।
ऐतिहासिक दिन पर प्रशासनिक परिवर्तन
करीब 95 वर्षों पूर्व 13 फरवरी 1931 को नई दिल्ली का औपचारिक उद्घाटन हुआ था। उसी तारीख पर नए प्रशासनिक परिसर का उद्घाटन केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि औपनिवेशिक दौर से आधुनिक प्रशासनिक ढांचे की ओर बढ़ते भारत का संकेत माना जा रहा है।
एकीकृत होगा शीर्ष शासन तंत्र
‘सेवा तीर्थ’ परिसर में अब प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एक ही स्थान पर समेकित किया गया है। पहले ये संस्थान अलग-अलग भवनों में संचालित हो रहे थे। सरकार का मानना है कि इससे नीतिगत निर्णयों में तेजी, बेहतर समन्वय और कार्यकुशलता सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री ने नाम पट्टिका का अनावरण करने के बाद पूरे परिसर का अवलोकन भी किया। शाम करीब छह बजे यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम भी है।
नॉर्थ-साउथ ब्लॉक से होगा चरणबद्ध स्थानांतरण
1931 से सत्ता के केंद्र रहे नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से मंत्रालयों का चरणबद्ध तरीके से नए कर्तव्य भवनों में स्थानांतरण किया जाएगा। नॉर्थ ब्लॉक में गृह और वित्त मंत्रालय तथा साउथ ब्लॉक में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और पीएमओ संचालित होते रहे हैं। भविष्य में इन ऐतिहासिक भवनों में ‘युगे युगेन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय स्थापित करने की योजना है।
कर्तव्य भवनों में शिफ्ट होंगे प्रमुख मंत्रालय
नए कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक, कॉर्पोरेट कार्य और जनजातीय कार्य सहित कई अहम मंत्रालयों के कार्यालय स्थापित किए गए हैं। दशकों से बिखरे दफ्तरों को एकीकृत कर प्रशासनिक खर्च में कमी और बेहतर समन्वय का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिसर
चार-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुरूप विकसित इन भवनों में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और उच्च सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय प्रणाली, केंद्रीकृत स्वागत कक्ष और सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र नागरिकों के लिए अधिक सुलभ और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा हैं। ऐसे में 95 वर्ष बाद उसी ऐतिहासिक दिन नए प्रशासनिक परिसर का उद्घाटन भारत के शासन तंत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक निर्णायक और दूरगामी कदम माना जा रहा है।






