फतेहपुर: सरकंडी ग्राम सभा में सामने आए मनरेगा मजदूरी घोटाले (MNREGA scam) के मामले में जेल भेजे गए खजुहा ब्लॉक के तत्कालीन खंड विकास अधिकारी (BDO) विश्वनाथ पाल को अदालत से राहत मिल गई है। जिला न्यायालय ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली, जिसके बाद आवश्यक जमानत पत्र भरने की प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें देर शाम जेल से रिहा कर दिया गया।
गौरतलब है कि बीडीओ विश्वनाथ पाल पर मनरेगा योजना के तहत मजदूरी भुगतान में करीब 55 लाख रुपये के घोटाले का आरोप है। इस मामले में 28 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया था कि सरकंडी ग्राम सभा में मनरेगा के कार्यों में फर्जी तरीके से मजदूरी का भुगतान दिखाया गया, जबकि वास्तविक रूप से कार्य या तो हुआ ही नहीं या फिर मजदूरों को भुगतान नहीं मिला।
बताया गया कि बीडीओ विश्वनाथ पाल असोथर ब्लॉक में तैनाती के दौरान हुए इस घोटाले की जांच में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए थे। उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस और जांच एजेंसियों ने 28 जुलाई को खजुहा स्थित उनके कार्यालय से गिरफ्तारी की थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
30 जनवरी को एसीजेएम की अदालत में पेशी के दौरान उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी, जिसके बाद बीडीओ को जेल में ही रहना पड़ा। इसके बाद परिजनों और पीडीएस संवर्ग से जुड़े अधिकारियों की ओर से पैरवी तेज की गई। अधिवक्ताओं ने जिला जज की अदालत में पुनः जमानत अर्जी दाखिल की, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें जमानत देने का आदेश पारित किया।
जमानत मिलने की खबर के बाद बीडीओ के परिजनों ने राहत की सांस ली। वहीं, प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में बड़े पैमाने पर घोटाले के आरोप ने पहले ही जिले में हलचल मचा रखी है।
हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद बीडीओ विश्वनाथ पाल की कानूनी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। मामले की जांच अभी जारी है और अदालत में सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। प्रशासन का कहना है कि मनरेगा योजना में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


