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Friday, April 10, 2026

फर्रुखाबाद में ‘जीरो टोलरेंस’ पर दोहरी नीति पुलिस सख्त, मगर डीएम का रहम

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– सार्वजनिक मंचों पर डीएम संग दिखने लगीं माफिया की पत्नी मीनाक्षी दुबे
फर्रुखाबाद। प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित ‘जीरो टोलरेंस’ नीति को जहां पुलिस स्तर पर सख्ती से लागू किया जा रहा है, वहीं जनपद में प्रशासनिक स्तर पर इस नीति की हवा निकलती दिखाई दे रही है। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की कार्यशैली के चलते एक ओर माफियाओं पर कार्रवाई हो रही है, तो दूसरी ओर उन्हें संरक्षण भी मिलता नजर आ रहा है।
जनपद के टॉप-10 सूचीबद्ध माफिया डॉ. अनुपम दुबे का मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अनुपम दुबे हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काटते हुए मथुरा जेल में बंद है, जबकि उसके भाई अनुराग दुबे उर्फ डब्बन और अमित दुबे उर्फ बब्बन गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल में निरुद्ध रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ माह पूर्व जब अमित दुबे बब्बन जेल से बाहर आया, तो उसे दोबारा मोहम्मदाबाद ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर बैठा दिया गया, जिस पर प्रशासन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए। हालांकि बाद में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए उसे पुनः गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोहम्मदाबाद ब्लॉक में पिछले करीब चार वर्षों से स्थायी ब्लॉक प्रमुख नहीं है, लेकिन जिलाधिकारी द्वारा अब तक दोबारा चुनाव नहीं कराए गए। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता या फिर किसी विशेष संरक्षण की ओर इशारा करती है।
इतना ही नहीं, माफिया की पत्नी मीनाक्षी दुबे, जो एक सरकारी विद्यालय में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं, उन पर भी गंभीर आरोप हैं कि वे लंबे समय से विद्यालय नहीं गईं। पूर्व में उन्हें निलंबित भी किया गया था, लेकिन अब तक बर्खास्तगी जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह अनुराग दुबे डब्बन, जो स्वयं भी सरकारी शिक्षक है, उसके विद्यालय में उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, बावजूद इसके अब तक विभागीय स्तर पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई।
यह पूरा मामला प्रशासनिक निष्पक्षता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। एक तरफ पुलिस द्वारा माफियाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर सरकार की मंशा को जमीन पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर ढील और कथित संरक्षण से ‘जीरो टोलरेंस’ की नीति कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
जनपद में यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकार की छवि पर भी इसका असर पड़ सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में ‘जीरो टोलरेंस’ नीति को पूरी मजबूती के साथ लागू किया जा सकेगा।

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