फर्रुखाबाद। मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर चल रहे व्यापक आंदोलन के बीच अब मध्य व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों को लेकर एक नई और अहम मांग सामने आई है। मांग की जा रही है कि फर्रुखाबाद, कन्नौज, मैनपुरी, एटा, इटावा, कासगंज सहित आसपास के जनपदों को प्रयागराज स्थित उच्च न्यायालय के बजाय लखनऊ हाईकोर्ट बेंच से जोड़ा जाए।
इन जनपदों के वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों का कहना है कि प्रयागराज में उच्च न्यायालय स्थित होने के कारण उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय, धन और संसाधनों की भारी बर्बादी होती है। गरीब और मध्यम वर्ग के वादकारियों के लिए प्रयागराज जाकर मुकदमे की पैरवी करना बेहद कठिन हो जाता है।
वादकारियों का कहना है कि कई मामलों में केवल एक तारीख के लिए पूरे दिन का सफर, ठहरने का खर्च और काम का नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे न्याय प्रक्रिया उनके लिए बोझ बन जाती है।
इन जिलों के लोगों का तर्क है कि लखनऊ भौगोलिक रूप से कहीं अधिक नजदीक और सुगम है। यदि इन जनपदों को लखनऊ हाईकोर्ट बेंच से जोड़ा जाता है, तो वादकारियों को न्याय तक आसान पहुंच मिलेगी,अधिवक्ताओं को भी पैरवी में सुविधा होगी,न्याय प्रक्रिया तेज और सुलभ बनेगी।
मेरठ में हाईकोर्ट बेंच स्थापना को लेकर चल रहे आंदोलन के चलते यह मुद्दा फिर से जोर पकड़ने लगा है। अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब पश्चिमी यूपी के लिए अलग बेंच की मांग जायज है, तो इन जनपदों को लखनऊ बेंच से जोड़ने की मांग भी उतनी ही तार्किक और आवश्यक है।
स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में न्यायिक ढांचे का संतुलन बेहद जरूरी है। सभी जिलों को एक ही उच्च न्यायालय से जोड़ना व्यवहारिक नहीं है। दूरी और जनसंख्या को देखते हुए बेंचों का पुनर्गठन समय की मांग बन चुका है।
मेरठ हाईकोर्ट बेंच आंदोलन के बीच नई मांग, फर्रुखाबाद–कन्नौज समेत कई जनपद लखनऊ हाईकोर्ट बेंच से जोड़े जाएं


