फर्रुखाबाद। शनिवार से फर्रुखाबाद के ऐतिहासिक पांचाल घाट पर भव्य श्रीरामनगरिया मेला शुरू हो गया है। मेला स्थल पर हजारों की संख्या में संत और श्रद्धालु कल्पवास करने के लिए पहुंच गए हैं। घाट पर तंबुओं और झोपड़ियों का एक शहर बस चुका है, जहां आध्यात्म और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। श्रद्धालु जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और आराध्य की कृपा प्राप्त करने की कामना लेकर यहां आए हैं। भक्ति, भजन, गंगा स्नान और दान-पुण्य के माध्यम से वे अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं।
कल्पवासी आधुनिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर तंबू-झोपड़ियों में रहकर कठोर व्रत और साधना कर रहे हैं। तीन समय स्नान, दान और भजन के क्रम में वे पूर्ण दिन भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं। यह मेला प्रयागराज संगम के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा माघ मेला माना जाता है, जो गंगा की पवित्र रेती पर लगभग 3 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। पांचाल घाट, जहां गंगा चंद्राकार बहती है, ‘अपर काशी’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। महाभारत काल से यह घाट धार्मिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है।
मेलावासियों के लिए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा की व्यापक तैयारियां की हैं। पूरे मेला क्षेत्र में 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके लिए एलोपैथिक, होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक अस्पताल बनाए गए हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र में सांस्कृतिक पंडाल और विकास प्रदर्शनी भी स्थापित की गई है। प्रदर्शनी में 41 स्टार लगाए गए हैं, जबकि सूचना विभाग द्वारा भी विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है।
कल्पवास में हिस्सा लेने के लिए केवल फर्रुखाबाद से ही नहीं, बल्कि हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, मैनपुरी, कन्नौज, लखीमपुर खीरी, सीतापुर सहित कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। इसके साथ ही कई राज्यों से भी संत यहां आए हैं। जूना अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा और दांडी संतो के शिविर भी लग चुके हैं। संत प्रेमदास बाबा, स्वामी श्यामानंद, कपिल देव महाराज, स्वामी नर्मदानंद, पागल बाबा, स्वामी अवध बिहारी दास सुबोध आश्रम सहित अन्य प्रमुख संत भी मेला में मौजूद हैं।
इस पावन अवसर पर श्रद्धालु अपने गृहस्थ जीवन की सुख-सुविधाओं को त्यागकर संन्यासियों की तरह जीवन व्यतीत करते हैं। वे स्वयं का कायाकल्प करने और जीते जी मोक्ष प्राप्त करने की कामना लेकर भक्ति में लीन हैं। मेला क्षेत्र में धर्म और संस्कृति की झलक के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह सुनिश्चित की गई है। इस प्रकार, श्रीरामनगरिया मेला फर्रुखाबाद और आसपास के जिलों के लिए न केवल धार्मिक महोत्सव है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन बन गया है।






