फर्रुखाबाद| ऐतिहासिक पांचाल घाट पर 3 जनवरी से शुरू हुआ मेला श्रीराम नगरिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। माघी पूर्णिमा के बाद से यहां बसे तंबुओं का शहर धीरे-धीरे उजड़ने लगा है। हजारों की संख्या में कल्पवास के लिए पहुंचे संत और श्रद्धालु मां गंगा में स्नान व पूजन कर सलामती की दुआ मांगते हुए अपने-अपने आश्रमों और घरों की ओर लौट रहे हैं। करीब 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस विशाल मेले में अब पहले जैसी चहल-पहल नहीं रही और दूर-दूर तक खाली स्थान दिखाई देने लगे हैं।
प्रयागराज के बाद फर्रुखाबाद का माघ मेला विशेष धार्मिक महत्व रखता है। हर वर्ष जिला प्रशासन कल्पवास के लिए आने वाले संतों और श्रद्धालुओं के लिए लगभग एक माह तक ठहरने, भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करता है। इस वर्ष मेला 3 जनवरी से प्रारंभ होकर 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा तक चला। माघी पूर्णिमा संपन्न होते ही कल्पवासियों का लौटना शुरू हो गया, जिससे मेले की रौनक धीरे-धीरे कम होने लगी।
बीते कुछ दिनों में बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु अपने तंबू, सामान समेटकर गंगा पूजन के बाद अपने गंतव्यों के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। जहां कुछ दिन पहले तक हवन-पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है। प्रशासन के अनुसार शेष बचे कल्पवासी भी फरवरी के पहले सप्ताह तक यहां से विदा हो जाएंगे।
मेला श्रीराम नगरिया में इस वर्ष करीब 800 दुकानें लगाई गई थीं। इनमें पूजा सामग्री, खाद्य पदार्थ, वस्त्र और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की दुकानें शामिल थीं। हालांकि अब भी अधिकांश दुकानें मौजूद हैं, लेकिन दुकानदार एक-दो दिन में अपना सामान समेटने की तैयारी में हैं। कन्नौज से आए दुकानदार अमित ने बताया कि इस बार उम्मीद के अनुसार बिक्री नहीं हो सकी, फिर भी मेला उनके लिए एक अनुभव रहा।
हालांकि मेले के धार्मिक क्षेत्र में सन्नाटा बढ़ रहा है, लेकिन पांचाल घाट पर मनोरंजन क्षेत्र में अभी भी कुछ रौनक बनी हुई है। यहां लगे झूले और अन्य मनोरंजन के साधन अब भी संचालित हो रहे हैं, जहां स्थानीय लोग और आसपास के गांवों से आए बच्चे व परिवार पहुंच रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि मेला पूरी तरह समाप्त होने तक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से जारी रहेंगी, ताकि शेष श्रद्धालुओं और दुकानदारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।






