ढाका
दक्षिण एशियाई देश बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब तक 118 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) ने मंगलवार को जारी आंकड़ों में बताया कि ये मौतें 15 मार्च से लेकर सोमवार सुबह तक दर्ज की गई हैं। तेजी से बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, केवल रविवार और सोमवार के बीच 24 घंटों में ही पांच लोगों की जान चली गई। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि संक्रमण कितनी तेजी से फैल रहा है।
डीजीएचएस के मुताबिक, देश में खसरे के संदिग्ध मामलों की संख्या 2006 तक पहुंच चुकी है। इन मरीजों में अधिकतर बच्चे हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
खसरा एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो खासकर कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों को तेजी से अपनी चपेट में लेती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात चिंता पैदा करने वाले हैं। यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो संक्रमण और अधिक फैल सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल आपातकालीन उपायों से इस प्रकोप को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं होगा। इसके लिए स्वास्थ्य प्रणाली में दीर्घकालिक सुधार जरूरी हैं।
टीकाकरण की कमी और जागरूकता का अभाव भी इस संकट के प्रमुख कारणों में गिने जा रहे हैं। कई क्षेत्रों में बच्चों को समय पर वैक्सीन नहीं मिल पा रही है।
सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रयास कर रही हैं। अस्पतालों में अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा रहे हैं और प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।
हालांकि, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी चुनौती बनी हुई है। यहां समय पर इलाज और जांच की सुविधा सीमित है।
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों ने भी स्थिति पर चिंता जताई है और बांग्लादेश को आवश्यक सहायता देने की बात कही है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों के प्रयास कितने कारगर साबित होते हैं और क्या इस गंभीर प्रकोप पर समय रहते काबू पाया जा सकता है।


