लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश में बढ़ते सामाजिक-आर्थिक संकटों पर एक बार फिर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। एयरलाइंस संचालन की अराजकता और यात्रियों द्वारा पिछले एक सप्ताह से झेली जा रही भारी मशक्कत पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार को इस पूरे मामले का हल व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता देने की बजाय जनहित को केंद्र में रखकर निकालना चाहिए, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हवाई यात्राएं आम लोगों के लिए पहले ही भारी हो चुकी हैं, ऊपर से संचालन में अव्यवस्था ने आम यात्रियों को जिस तरह बेहाल किया है, वह सरकार की जिम्मेदारी और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
मायावती ने इसके साथ ही दिल्ली सहित कई महानगरों में बढ़ते वायु प्रदूषण, दमघोंटू हवा और लगातार बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदूषण आज सिर्फ एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य, रोजगार, अर्थव्यवस्था और जीवनशैली पर सीधा हमला बनकर सामने आया है।
इसके साथ ही उन्होंने रुपये की लगातार गिरती कीमत, महंगे आयात, बढ़ती महंगाई और कमजोर होती अर्थव्यवस्था की ओर इशारा करते हुए कहा कि आम जनमानस पर इसका बोझ दिनों-दिन बढ़ रहा है, लेकिन सरकार की नीतियों में दूरदृष्टि और संवेदनशीलता की कमी साफ दिखाई दे रही है।
बसपा सुप्रीमो ने अपने बयान में कहा कि इन समस्याओं का स्थायी, न्यायसंगत और समग्र समाधान तभी संभव है जब भारतीय संविधान की भावना और सिद्धांतों को देश में आमजन के हित में सख्ती से और ईमानदारी के साथ लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने बहुजन समाज व कमजोर तबकों को शक्तिशाली बनाने और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया तथा अनेक ऐतिहासिक कानून बनवाए, लेकिन वर्तमान सरकारें उन सिद्धांतों को जमीन पर उतारने में विफल दिख रही हैं।
मायावती ने डॉ. आंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ, नोएडा तथा देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए अपने कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने कहा कि संविधान लागू करने में किसी भी तरह की लापरवाही या उसकी भावना से विचलन समाज को असमानता, अराजकता और आर्थिक संकट की ओर धकेल सकता है, इसलिए सरकार को अपनी नीतियों में व्यवसायिक लाभ से ऊपर उठकर सार्वजनिक हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।





