लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद चुनावी राजनीति को प्रभावित करने वाला बड़ा बदलाव सामने आया है। प्रदेश की मतदाता सूची से करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कटने जा रहे हैं। SIR फॉर्म जमा करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन विभाग ने आंकड़े सार्वजनिक कर दिए हैं, जिनके मुताबिक अंतिम सूची जारी होने तक मतदाता संख्या और घट-बढ़ सकती है।
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर कराए गए विशेष सघन पुनरीक्षण में सामने आया कि वर्ष 2003 की मूल मतदाता सूची से 91 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान हो चुका है, जबकि 1.13 करोड़ मतदाताओं का रिकॉर्ड 2003 की सूची से मेल नहीं खा सका। ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी कर उनसे पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 46 लाख मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं, जबकि 23.70 लाख डुप्लीकेट मतदाता पाए गए हैं। इसके अलावा 83.73 लाख वोटर्स ऐसे हैं, जो लंबे समय से अपने पते पर नहीं मिले या जिनकी स्थिति संदिग्ध पाई गई है।
पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश में कुल 12.55 करोड़ मतदाता दर्ज होने का अनुमान है। निर्वाचन विभाग 31 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करेगा, जिस पर आम नागरिक 30 जनवरी तक आपत्तियां और दावे दर्ज करा सकेंगे। इन आपत्तियों के निस्तारण के बाद 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जो आगामी चुनावों के लिए आधार बनेगी।
निर्वाचन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है, ताकि फर्जी, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाकर केवल वास्तविक मतदाताओं को ही मतदान का अधिकार मिले। हालांकि, एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने की संभावना ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी तेज होने की उम्मीद है।





