जीवन जीने की कला सिखाती है श्री राम कथा: मनीष तिवारी

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फर्रुखाबाद। नगर के डी पी बी पी विद्यालय के प्रांगण में चल रही राम करने के दौरान मानस विद्वान मनीष तिवारी ने कहा कि राम कथा सुनने की नहीं बल्कि पीने की चीज है। इसके पीने से मनुष्य मात्र की आत्मा पवित्र हो जाती है। उन्होंने ने कहा कि अपने आचरण को राम कथा बनाना होगा उन्होंने भरत चरित्र , त्याग, तपस्या और साधना को अपने प्रवचन में शामिल किया।
मानस विदेशी कुंवारी आस्था दुबे ने कहा कि मानवता के पुजारी बनो। श्री राम की कथा सारी व्यथा मिटा देती है। सत्संग ही उन्होंने कहा कि सत्संग की मोक्ष का माध्यम है ।आस्था पत्थर को भी भगवान बना देती है। उन्होंने अपने प्रवचन के दौरान राम राज्य का वर्णन करते हुए सभी को भव्य होकर दिया और आचरण में परिवर्तन का मंत्र दिया। प्रीति रामायणी ने कहा कि राम कथा आचरण में उतरने की आवश्यकता है। अरिमर्दन शास्त्री ने कहा कि कर्म ही भाग्य और प्रारंभ का निर्माण करते हैं उन्होंने कहा कि जटायु को अपने चलते वक्त भगवान की गोद मिली क्योंकि जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए अपने प्राण निछावर कर दिये। वही पितामह भीष्म को तमाम धर्म करने के बावजूद भी सर सैया पर लेटना बड़ा क्योंकि उन्होंने धर्म के साथ चुपचाप खड़े रहना स्वीकार किया था। इस तरीके से किए गए कार्य प्रारंब्ध का निर्माण करते हैं। सर्वेश कुमार शुक्ला ने कहा कि राम कथा सतसंगति से प्राप्त होती है। संचालन बृज किशोर सिंह किशोर ने किया। व्यवस्था में संयोजक भारत सिंह, मीडिया प्रभारी राजेश निराला, गुड्डू सिंह, शकुंतला कनौजिया शारदा कनौजिया,रमा कनौजिया,आदि ने योगदान दिया।

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