मानस सम्मेलन:जीवन में सत्कर्म कर के मानव जन्म को सार्थक बनाने का दिया संदेश

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फर्रुखाबाद। डी पी वी पी विद्यालय के प्रांगण में चल रही राम कथा में बोलते हुए हमीरपुर से आए हुए मानस विद्वान अरिमर्दन शास्त्री ने कहा कि परमात्मा कण कण में व्याप्त है। लेकिन साधारण रूप से उसे हम देख नहीं सकते इसलिए संत और गुरु की संगत और उनका आशीर्वाद आवश्यक होता है। उन्होंने इसकी व्याख्या तुलसी के मानस के आधार पर की। उन्होंने मीराबाई और संत रविदास के प्रसंग के माध्यम से भक्ति और आध्यात्म प्रभु दर्शन पर विचार व्यक्त किए।
दिल्ली से आई हुई प्रीति रामायणी ने मानव जीवन में ईश्वर भक्ति के लिए धरती पर मानवीय कर्म करने पर बल दिया और कहा कि बड़े भाग मानुष पाव यह मनुष्य की देह बहुत ही भाग्य से मिलती है इसलिए सब कर्म करके इसका सदुपयोग किया जाना चाहिए। सर्वेश रामायणी ने कहा कि मानस में जीने का रास्ता बताती है उसका आचरण और शिक्षाओं को ग्रहण करना ही आध्यात्मिक आयोजनों का सार्थक संदेश होगा। कथा वाचक राधा शर्मा ने मानस में भगवान शंकर द्वारा माता पार्वती को राम कथा सुनाए जाने के प्रसंग का वर्णन किया।
कथा का संचालन बृज किशोर सिंह किशोर सर्वेश शुक्ला ने किया। संयोजक भारत सिंह व्यवस्था में लग रहे और आने वाले लोगों का स्वागत किया। जानकारी मीडिया प्रभारी राजेश निराला ने दी। कथा में शारदा भदौरिया, शकुंतला कनौजिया, मीरा गुप्ता, निर्मल सिंह रजनी, कनौजिया प्रभा कनौजिया ने की आरती उतारी अभिनव, राम जी ,बलराम, युवराज ,प्रशांत चंदन सिंह अमन राजपूत व्यवस्था में सहयोगी बने रहे।

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