– केंद्र सरकार की अधिसूचना से पूरे देश में लागू होंगे नए नियम
– मीटरिंग सिस्टम में पारदर्शिता के दावे, उपभोक्ताओं पर असर तय
जनता की आपत्तियों के बाद भी CEA ने लागू किए संशोधन
अनुराग तिवारी
नई दिल्ली। देश की बिजली व्यवस्था में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने मीटरिंग से जुड़े नियमों में संशोधन लागू कर दिया है। यह बदलाव भारत का राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के जरिए लागू किया गया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जा रहा है। यह संशोधन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा किया गया है, जिसमें “विद्युत (मीटरों की स्थापना एवं संचालन) विनियम, 2006” में अहम बदलाव शामिल हैं। इस फैसले से पहले फरवरी 2026 में इसका मसौदा जारी कर आम जनता और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।
बताया जा रहा है कि प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम अधिसूचना जारी की गई है, लेकिन इसके बावजूद कई उपभोक्ता संगठनों में इस बदलाव को लेकर चिंता भी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संशोधन से बिजली मीटरिंग प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ेगी, जिससे बिजली चोरी और बिलिंग विवादों पर अंकुश लग सकता है। वहीं दूसरी ओर, उपभोक्ताओं पर इसके संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सरकार का दावा है कि यह कदम बिजली क्षेत्र को आधुनिक और जवाबदेह बनाने की दिशा में उठाया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर क्या होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो पाएगा।
क्या बदलेगा? स्मार्ट और एडवांस मीटरिंग सिस्टम को बढ़ावा
बिलिंग और खपत डेटा की सटीक निगरानी, बिजली चोरी पर सख्ती
क्या चिंता? उपभोक्ताओं पर बढ़ सकता है वित्तीय दबाव, तकनीकी बदलावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौती। सरकार के इस फैसले ने बिजली व्यवस्था में सुधार की उम्मीद तो जगाई है, लेकिन इसके असर को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।


