इटावा। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला के साथ हुए दुष्कर्म मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस गंभीर प्रकरण में गठित नौ सदस्यीय जांच समिति ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए.के. मिश्रा सहित वार्ड में तैनात 14 कर्मचारियों को लापरवाही और जिम्मेदारी में चूक का दोषी माना है। साथ ही सफाई व्यवस्था संभाल रही निजी कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
शनिवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसके बाद प्रशासन ने संबंधित सभी आरोपितों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. एस.पी. सिंह को जांच अधिकारी तथा प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार सचवानी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है। पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से जांच की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का भी निर्णय लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार जांच में वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था, ड्यूटी सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और संविदा कर्मचारियों की तैनाती में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी और जवाबदेही तय न किए जाने के कारण यह गंभीर घटना लंबे समय तक छिपी रही और समय रहते सामने नहीं आ सकी।
गौरतलब है कि मानसिक रोग विभाग में 14 जून 2025 को करीब 38 वर्षीय अज्ञात महिला को भर्ती कराया गया था, जो बोलने और समझने में असमर्थ है और लंबे समय से उपचाराधीन थी। 17 मार्च 2026 को नियमित जांच के दौरान उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिससे इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में सफाई कर्मी रविंद्र कुमार वाल्मीकि, निवासी लखना थाना बकेवर, को मुख्य आरोपी बनाया गया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता और आरोपी के डीएनए नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे हैं और न्यायालय में पीड़िता के बयान दर्ज कराए गए हैं। घटना सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विभागाध्यक्ष को पद से हटाने के साथ ही संबंधित वार्ड में तैनात कई कर्मचारियों को भी हटा दिया था और पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी।
यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि ऐसी घटनाएं मानवता को शर्मसार करती हैं और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी है।


