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Friday, January 30, 2026

परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा सुधार, 50–150 करोड़ तक मंजूरी के अधिकार तय

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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं (projects) की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं। वित्त विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब विभागीय स्तर पर स्वीकृति की सीमा बढ़ाई जाएगी, ताकि विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी न हो और काम समय से पूरे किए जा सकें।

अब 50 करोड़ तक मंत्री, 150 करोड़ तक वित्त मंत्री करेंगे मंजूरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि₹50 करोड़ तक की परियोजनाओं को विभागीय मंत्री स्तर से वित्तीय स्वीकृति दी जाएगी।₹50 से ₹150 करोड़ तक की परियोजनाओं की मंजूरी वित्त मंत्री स्तर पर होगी।₹150 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए मुख्यमंत्री स्तर से अनुमोदन अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था से परियोजनाओं को समयबद्ध स्वीकृति मिलेगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल तक हर हाल में स्वीकृत करा लें। समयसीमा का पालन न करने वाले विभागों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही से जोड़ा।

लागत में 15% से अधिक बढ़ोतरी पर पुनः अनुमोदन जरूरी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होती है, तो संबंधित विभाग को कारण सहित पुनः वित्तीय अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। इससे अनियंत्रित लागत वृद्धि पर रोक लगेगी। शासकीय भवनों के लिए भी 5 वर्ष का अनुरक्षण सड़क निर्माण की तर्ज पर अब शासकीय भवनों के अनुरक्षण के लिए भी 5 वर्ष की भुगतान-आधारित अनुरक्षण व्यवस्था लागू होगी। मुख्यमंत्री ने पुराने भवनों के लिए कॉर्पस फंड बनाने की आवश्यकता भी बताई।

मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए कि आशा बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय हर माह तय तिथि पर उनके खातों में पहुंचना चाहिए। जिन योजनाओं में केंद्रांश शामिल है, वहां राज्य अपने संसाधनों से समय पर भुगतान करे, ताकि किसी भी कर्मी को देरी का सामना न करना पड़े। पूंजीगत खर्च में यूपी देश में शीर्ष पर बैठक में बताया गया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश का ₹1,10,555 करोड़ का पूंजीगत व्यय देश में सबसे अधिक रहा। कुल व्यय का 9.39% निवेश पर खर्च कर यूपी देश में पहले स्थान पर रहा।राज्य ने जितना शुद्ध लोक ऋण लिया, उससे अधिक राशि पूंजीगत कार्यों पर खर्च की।

राजकोषीय घाटा, राजस्व घाटा और ऋण/जीएसडीपी अनुपात सभी एफआरबीएम मानकों के अनुरूप रहे। वर्ष 2024-25 में राज्य की कुल देयताएं घटकर जीएसडीपी के 27% पर आ गई। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि नीति आयोग के अनुसार यूपी का कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है और राज्य फ्रंट रनर श्रेणी में पहले स्थान पर है। आरबीआई रिपोर्ट के अनुसार यूपी का अपना कर राजस्व राष्ट्रीय हिस्सेदारी में 11.6% के साथ देश में दूसरे स्थान पर है। स्वास्थ्य और विकास व्यय में भी राज्य राष्ट्रीय औसत से आगे है।

डिजिटल वित्तीय सुधारों पर जोर

वित्त विभाग ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में ऑनलाइन बजट मॉड्यूल,वेंडर मैनेजमेंट सिस्टम, साइबर ट्रेज़री,पूरी तरह ऑनलाइन बिल प्रेषण,डिजिलॉकर पर जीपीएफ स्लिप जैसे कई बड़े डिजिटल सुधार लागू किए गए हैं। अप्रैल 2026 तक साइबर ट्रेज़री पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सड़क, भवन, सेतु, सीवर लाइन और जलापूर्ति परियोजनाओं की थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट आईआईटी, एनआईटी और सरकारी तकनीकी संस्थानों से कराई जाए, ताकि निर्माण गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने वित्तीय अनुशासन और पूंजीगत निवेश में देश के लिए नया मानक स्थापित किया है। अब लक्ष्य है कि खर्च की गुणवत्ता, डिजिटल पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत कर प्रदेश को भारत का सबसे सक्षम और विश्वसनीय वित्तीय प्रशासन वाला राज्य बनाया जाए।

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