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Thursday, January 1, 2026

अवैध निर्माण पर बड़ा प्रहार — डीएम के आदेश से बीएस गार्डन, नाजिम पेट्रोल पंप और HDFC बैंक भवन के ध्वस्तीकरण का रास्ता साफ

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– अभियान चलाकर वर्ष 2023 में चिन्हित की गई थी अमूल्य सरकारी कब्जा की गई जमीनें
– तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव द्वारा पारित आदेशों से सरकार को होगा 40 से 50 करोड़ की भूमि का फायदा

फर्रुख़ाबाद: जनपद में अवैध निर्माण (illegal constructions) और सरकारी भूमि पर कब्जे के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। एक्शन में ईडीएम (DM) आशुतोष कुमार द्विवेदी ने तत्कालीन जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह द्वारा छेड़े गए अभियान को वर्ष 2023 में जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह और नगराधिकारी श्रीमती दीपाली भार्गव के कार्यकाल में अमली जामा पहनाया था जो अपीलों में अटका था लेकिन अब सरकार को अपनी कब्जा हुई जमीनों को वापस लेने का रास्ता मिल गया है।

जिलाधिकारी एवं नियामक प्राधिकारी बोर्ड के अध्यक्ष आशुतोष कुमार द्विवेदी ने नगर मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेशों को वैधानिक और उचित ठहराया है, अब 18 भवनों सहित कई बड़े अबैध वाणिज्यिक परिसरों के ध्वस्तीकरण का लंबे समय से अटका काम वर्ष 2025 के जाते-जाते पूरा हो जाएगा। इस निर्णय के बाद केएम इंडिया (ठंडी सड़क), बीएस गार्डन (रोडवेज बस स्टॉप), नाजिम पेट्रोल पंप, एचडीएफसी बैंक संचालित भवन और बीएस मंडपम सहित तमाम निर्माण अब ध्वस्तीकरण की श्रेणी में आ गए हैं।

जिला प्रशासन के सख्त तेवर के चलते अवैध कब्जों पर गिरेगी गाज जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि —

 

“सरकारी भूमि, तालाब या जलाशय की किसी भी इंच पर अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नगर मजिस्ट्रेट के पूर्व आदेश पूरी तरह वैधानिक हैं और उनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।”

उनके सख्त निर्देशों के बाद नियामक प्राधिकारी बोर्ड ने गौर हरि अग्रवाल की अपील को बलहीन और निराधार मानते हुए अस्वीकार कर दिया तथा मामले की पत्रावली वापस अभियंता प्राधिकरण को भेज दी। इसके साथ ही नगर मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव द्वारा 17 अप्रैल 2023 को पारित आदेश को पूर्णतः सही ठहराया गया। वर्ष 2023 में नगर मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव ने व्यापक सुनवाई के बाद पाया था कि ठंडी सड़क और अल्लाह नगर उर्फ बढ़पुर क्षेत्र में स्थित कई भवनों — विशेष रूप से केएम इंडिया हाउस, बीएस गार्डन, एचडीएफसी बैंक संचालित भवन, बीएस मंडपम, और नाजिम पेट्रोल पंप — का निर्माण सरकारी भूमि और तालाब क्षेत्र पर अवैध रूप से किया गया था।

उन्होंने तत्कालीन रिपोर्टों और रजिस्ट्रियों की जांच के बाद कुल 18 मानचित्र निरस्त कर दिए थे और सभी संबंधित भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पारित किए थे। उसी आदेश के क्रम में प्रशासन ने माफिया अनुपम दुबे के स्वामित्व वाले होटल गुरुशरणम को 2023 में ध्वस्त कर दिया था। हालांकि, अन्य भवनों के मालिकों ने अपील दायर कर कार्रवाई रोक दी थी — अब वह रोक भी खत्म हो चुकी है।

18 अवैध भवनों की सूची में प्रमुख नाम,केएम इंडिया हाउस (ठंडी सड़क, अल्लाह नगर), बीएस गार्डन (रोडवेज बस स्टॉप के पास), एचडीएफसी बैंक भवन (ठंडी सड़क),बीएस मंडपम (ठंडी सड़क) नाजिम पेट्रोल पंप ( निकट रोडवेज बस अड्डा फर्रुखाबाद )माफिया अनुपम दुबे का होटल गुरुशरणम (पहले ही ध्वस्त),अन्य 12 भवन जिनके मानचित्र फर्जी स्वीकृति के आधार पर स्वीकृत कराए गए थे। जांच में यह भी उजागर हुआ कि यह निर्माण तत्कालीन नियोजन प्राधिकरण के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से संभव हुआ था।

जिलाधिकारी ने आदेश में उल्लेख किया है कि —

 

“सरकारी भूमि पर निर्माण की अनुमति देने वाले दोषी अभियंताओं और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी और दोष सिद्ध होने पर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

यह विवाद वर्ष 2013 से न्यायिक प्रक्रिया में उलझा हुआ था, तत्कालीन अभियंताओं की रिपोर्ट में तालाब पर निर्माण की पुष्टि हुई थी, किंतु लगातार अपीलों और स्थगनों के कारण कार्रवाई टलती रही। अब जिलाधिकारी के सख्त हस्तक्षेप के बाद यह मामला निर्णायक स्थिति में पहुँच गया है।

यह फैसला न केवल फर्रुख़ाबाद प्रशासन की दृढ़ता का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भ्रष्ट तंत्र और भूमि माफिया का गठजोड़ अब नहीं बचेगा। नगर मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव की रिपोर्ट पर जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी द्वारा दोबारा मुहर लगाना, प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून के शासन की जीत माना जा रहा है।

इस कार्रवाई से अनुमान है कि करीब 2.5 एकड़ सरकारी भूमि और जलाशय क्षेत्र मुक्त होगा, जिसकी बाजार कीमत 40 से 45 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। नगर पालिका अगले सप्ताह ध्वस्तीकरण की समय-सारणी जारी करेगी।
भवन स्वामियों को 7 दिन का समय दिया गया है ताकि वे स्वयं अपने निर्माण हटा सकें। उसके बाद नगर निगम अपने स्तर से तोड़फोड़ की कार्रवाई करेगा और खर्च की वसूली भी की जाएगी। संबंधित अभियंताओं पर विजिलेंस जांच की अनुशंसा की जाएगी।

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