लखनऊ| प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 के दौरान स्थापित इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) ने न केवल भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई, बल्कि साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़ी सफलता हासिल की। प्रदेश सरकार की ओर से सोमवार को साझा की गई जानकारी के अनुसार इस अत्याधुनिक कमांड सेंटर ने महाकुंभ के 45 दिवसीय आयोजन के दौरान करीब 60 लाख साइबर हमलों को विफल किया। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से आईसीसीसी कितनी मजबूत और प्रभावी व्यवस्था के रूप में सामने आया। यूपी पुलिस के इस कमांड सेंटर को हाल ही में प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है, जो इसकी कार्यकुशलता और नवाचार का प्रमाण है।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि महाकुंभ-25 ने अपनी भव्यता, सुव्यवस्थित आयोजन और बेहतर प्रबंधन के कारण देश-दुनिया में विशेष सराहना प्राप्त की। 45 दिनों तक चले इस महाआयोजन में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इस विशाल आयोजन को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने में यूपी पुलिस के आईसीसीसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। कमांड सेंटर ने जहां जमीनी स्तर पर भीड़ नियंत्रण में मदद की, वहीं विशेषज्ञों की टीमों ने साइबर अपराधियों के मंसूबों को भी पूरी तरह नाकाम कर दिया। इसमें आईआईटी कानपुर और ट्रिपल आईटी इलाहाबाद के तकनीकी विशेषज्ञों का विशेष योगदान रहा।
तत्कालीन एडीजी जोन प्रयागराज और वर्तमान में एडीजी मेरठ आईपीएस भानु भास्कर ने बताया कि महाकुंभ की टेक्नोलॉजी आधारित सुरक्षा व्यवस्था में 56 साइबर वॉरियर्स लगातार मॉनिटरिंग में जुटे रहे, जिन्होंने डिजिटल सेफ्टी को पूरी तरह सुनिश्चित किया। खास बात यह रही कि साइबर डिफेंस को सिर्फ एक आईटी समस्या के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि इसे भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और जनता के भरोसे से सीधे जोड़कर लागू किया गया। इसी समन्वित दृष्टिकोण के चलते किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक सूचना फैलने से पहले ही उस पर नियंत्रण पा लिया गया।
कमांड सेंटर के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। पूरे महाकुंभ क्षेत्र में 2750 एआई आधारित कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी आईसीसीसी से की जा रही थी। इसके अलावा चार ऑपरेशनल आईसीसीसी यूनिट, 400 से अधिक प्रशिक्षित कार्मिक, 1920 कॉल सेंटर लाइनें, जैम-प्रूफ वायरलेस ग्रिड और 11 भाषाओं में संवाद करने वाला एआई चैटबॉट भी इस व्यवस्था का हिस्सा रहा। इन सभी तकनीकी संसाधनों ने मिलकर महाकुंभ को न केवल भव्य बल्कि सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक-संपन्न आयोजन के रूप में स्थापित





