– बिलबिलाया माफिया तंत्र, षड्यंत्रों के दौर भी शुरू
– कई लोग माफिया तंत्र के निशाने पर आये
– ख़ूनी जंग की भी आहट
फर्रुखाबाद। जनपद में माफियाओं के खौफ का पर्याय बन चुके अनुपम दुबे और उसके गैंग के साम्राज्य पर इस बार जिला प्रशासन ने ऐसा करारा प्रहार किया, जिसने पूरे माफिया नेटवर्क की नींद उड़ा दी।ऊपर से नर्म लेकिन क़ानून के मामलों में उतने ही कठोर जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी के सख़्त आदेशों और निर्भीक प्रशासनिक इच्छाशक्ति के चलते करीब 70 करोड़ रुपये मूल्य(बाजारू कीमत चार गुनी) की 4.3810 हेक्टेयर ज़मीन को माफिया के कब्ज़े से मुक्त कराकर हनुमान जी महाराज के नाम दर्ज कर दिया जाना ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि यह घटना जनपद के प्रशासनिक इतिहास का सुनहरा पन्ना बन गई ।
यह कार्रवाई सिर्फ ज़मीन की वापसी नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अब फर्रुखाबाद में कानून ही मालिक है, माफिया नहीं। हालांकि किसी आदेश के बाद माफिया तंत्र का खूनी खेर भी शुरू हो गया जिसने वादी मुकदमा दलित एकलव्य कुमार और उसके परिवार को न केवल झूठे मुकदमे का शिकार बनाया बल्कि जान मार के नुकसान का हिस्सा भी बना दिया, वह परिवार सहित घायल अवस्था में डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज करा रहा है।
हुईं जांच में सामने आया कि अनुपम दुबे और उसके सहयोगियों ने फर्जी दस्तावेज़ों, कूटरचित वसीयतों और राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर वर्षों पहले मंदिर ट्रस्ट की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा जमा लिया था।
लेकिन डीएम आशुतोष कुमार द्विवेदी ने न तो दबाव स्वीकार किया, न ही रसूख़ के आगे झुके। उन्होंने स्पष्ट कहा“धर्मस्थल की भूमि पर अवैध कब्ज़ा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”डीएम के आदेश पर राजस्व, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने रिकॉर्ड खंगाले, साक्ष्य जुटाए और अदालत के आदेशों के अनुरूप ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया।
जिस अनुपम दुबे के नाम से कभी गवाह कांपते थे, अधिकारी फाइलें दबा देते थे और पीड़ित बोलने से डरते थे,आज उसी माफिया की 70 करोड़ की संपत्ति सरकारी आदेश से हाथ से निकल गई।जनपद में यह चर्चा आम है कि“पहली बार किसी डीएम ने माफिया के किले में घुसकर झंडा गाड़ दिया।”कार्रवाई के बाद माफिया खेमे में सन्नाटा है।

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