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Thursday, April 2, 2026

मैनपुरी का ‘एम-बाई फैक्टर’ फर्रुखाबाद में हावी! समाज कल्याण विभाग में खुली लूट

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फर्रुखाबाद

समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित सामूहिक विवाह योजना को लेकर बड़ा खेल सामने आया है। मैनपुरी के रहने वाले अयाज मंसूरी और समाज कल्याण अधिकारी रेनू यादव के बीच मिलीभगत के चलते सरकारी धन के दुरुपयोग और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामला प्रदेश सरकार की पारदर्शिता और जीरो टॉलरेंस नीति पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मैनपुरी में बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात अयाज मंसूरी द्वारा अपने परिजनों के नाम से कई फर्में संचालित की जा रही हैं। इन्हीं फर्मों के माध्यम से फर्रुखाबाद में समाज कल्याण विभाग के कार्यों के टेंडर लगातार हासिल किए जा रहे हैं। आरोप है कि रेनू यादव से नजदीकी के चलते पिछले तीन वर्षों से एक ही नेटवर्क का दबदबा बना हुआ है, जिससे अन्य ठेकेदारों को मौका नहीं मिल पा रहा।
12 दिसंबर 2025 को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 441 जोड़ों की शादी कराई गई थी, जिसमें शासन द्वारा प्रति जोड़ा करीब एक लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान है। निर्देश दिए गए थे कि कार्यक्रम में बेहतर सुविधाएं और वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लेकिन भोजपुर स्थित मेजर एसडी सिंह यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में व्यवस्थाओं में कटौती कर बड़े स्तर पर धन की बचत की गई, जिससे घोटाले की आशंका जताई जा रही है। वायरल फोटो और वीडियो में देखा गया कि जहां अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था थी, वहीं आम लाभार्थियों को खाने तक के लिए भटकना पड़ा। समाज कल्याण अधिकारी रेनू यादव का दावा है कि अयाज मंसूरी के जिले के उच्च अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं और नजराना दिए जाने के कारण उसके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। यही वजह है कि विभाग में अन्य किसी ठेकेदार की एंट्री लगभग बंद हो चुकी है।
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण की साफ-सुथरी छवि के बीच यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सामूहिक विवाह योजना से जुड़े फोटो व वीडियो की समीक्षा की जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।

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