लखनऊ| राजधानी में बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केंद्र सरकार की सहायता से लखनऊ में कुल 28 नए 33/11 केवी बिजलीघरों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इन बिजलीघरों के निर्माण पर लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस महत्वाकांक्षी योजना का प्रस्ताव जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जिससे स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
बिजलीघरों के निर्माण के लिए अमौसी, लखनऊ मध्य, जानकीपुरम और गोमतीनगर जोन द्वारा अलग-अलग ब्लू प्रिंट तैयार किए गए हैं। इन नए बिजलीघरों के चालू होने से राजधानी की करीब 10 लाख की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और ओवरलोड, ट्रिपिंग तथा बार-बार होने वाली बिजली कटौती जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
जानकीपुरम जोन के मुख्य अभियंता वीपी सिंह ने बताया कि यदि प्रस्तावित छह बिजलीघर अगले दो वर्षों के भीतर नहीं बनाए गए तो इस क्षेत्र के उपभोक्ताओं को गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जानकीपुरम जोन में न्यू कैंपस, दाउदनगर, अहिबरनपुर, सुभाष पार्क, फैजुल्लागंज और मानपुर बाना (बीकेटी) उपकेंद्रों के आसपास ही नए 33/11 केवी बिजलीघर स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि मौजूदा नेटवर्क पर दबाव कम किया जा सके।
वहीं लखनऊ मध्य जोन के अधीक्षण अभियंता (तकनीकी) कमलेश कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि इस जोन में न्यू ऐशबाग, न्यू तालकटोरा, मल्लपुर, न्यू आरडीएसओ और न्यू ठाकुरगंज क्षेत्रों में नए बिजलीघर बनाए जाने का प्रस्ताव है। इन क्षेत्रों में आबादी घनत्व अधिक होने के कारण यहां बिजली आपूर्ति पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि यह योजना समय पर लागू हो जाती है तो लखनऊ की बिजली व्यवस्था आने वाले वर्षों के लिए काफी हद तक सुरक्षित और स्थिर हो जाएगी। साथ ही नए बिजलीघरों से न केवल घरेलू उपभोक्ताओं बल्कि व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों को भी बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।


