लखनऊ| राजधानी को बाल भिक्षावृत्ति से पूरी तरह मुक्त कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने सोमवार को एक और बड़ा कदम उठाया। छह महीने पहले शुरू किए गए पहले चरण की सफलता के बाद अब इस अभियान का दूसरा चरण आरंभ हो गया है। इस बार प्रशासन ने शहर के 10 प्रमुख बाजारों को बाल भिक्षावृत्ति से पूरी तरह मुक्त कराने का लक्ष्य तय किया है।
जिन बाजारों को इस चरण में शामिल किया गया है, उनमें हजरतगंज, अमीनाबाद, पत्रकारपुरम, भूतनाथ, जनपद मार्केट, लेखराज, बंगला बाजार, कपूरथला, गोल मार्केट (निशातगंज) और चारबाग मार्केट शामिल हैं। इन सभी इलाकों में बच्चों को भिक्षा मांगने से रोकने के लिए प्रशासनिक टीमें, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यापार संगठन मिलकर काम करेंगे।
जिलाधिकारी विशाख जी ने सोमवार को पत्रकारपुरम मार्केट का दौरा कर अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने व्यापारियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और अपील की कि वे इस मानवीय पहल में पूरा सहयोग दें। जिलाधिकारी ने कहा कि, “पिछले छह महीनों में हमने कई बच्चों को सड़क से निकालकर शिक्षा और देखभाल की दिशा में आगे बढ़ाया है। अब दूसरे चरण का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा लखनऊ की सड़कों पर भिक्षा न मांगे।
प्रशासन ने प्रत्येक बाजार में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है, जो लगातार निगरानी रखेंगे। इसके अलावा समाजसेवी संस्थाओं को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करें। इस पूरे अभियान में महिला कल्याण विभाग, चाइल्डलाइन, और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में करीब 250 बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कर शिक्षा और आश्रय प्रदान किया गया था। दूसरे चरण में यह संख्या बढ़ाने का लक्ष्य है। जिलाधिकारी ने कहा कि, “हमारा उद्देश्य सिर्फ सड़कों को भिक्षा से मुक्त करना नहीं, बल्कि उन बच्चों को नया जीवन देना है।
व्यापार संगठनों ने भी जिला प्रशासन के इस कदम की सराहना की है। व्यापारी नेता राकेश शर्मा ने कहा कि यह एक सराहनीय पहल है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।
प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि किसी भी भिक्षा मांगने वाले बच्चे को पैसे देने के बजाय संबंधित टीम को सूचना दें ताकि उसकी मदद सही दिशा में की जा सके।






