लखनऊ| तेजी से गिरती वायु गुणवत्ता ने प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। शनिवार को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने एल्डीको ग्रीन स्थित SBM हॉल में एक उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई, जिसमें नगर निगम, जलकल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ट्रैफिक पुलिस, वन विभाग और निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। लगातार बढ़ता AQI गंभीर स्तर में पहुंचने पर सभी विभागों को तुरंत, सख्त और समन्वयित कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए।
बैठक में नगर आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि शहर के उन इलाकों की तत्काल पहचान की जाए जहाँ AQI लगातार खराब या गंभीर श्रेणी में है। इन क्षेत्रों में निर्माण की धूल, वाहनों के धुएं, कचरा जलाने और सड़कों पर पड़े C&D कचरे के स्रोतों की सूची बनाकर त्वरित एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। उन्होंने सभी जिम्मेदार अधिकारियों की नामवार सूची बनाने का भी निर्देश दिया।
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने धूल को नियंत्रण में लाने के लिए मेकेनाइज्ड स्वीपिंग और नियमित पानी का छिड़काव अनिवार्य करने का आदेश दिया। शहर के प्रमुख मार्गों पर वाटर स्प्रिंकलिंग को सख्ती से लागू किया जाएगा। खुले में पड़े निर्माण एवं विध्वंस (C&D) मलबे को तुरंत हटाने का निर्देश देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि जिम्मेदार लोगों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। रेत, मिट्टी और गिट्टी ढोने वाले खुले ट्रकों पर लगाम कसने के लिए RTO और ट्रैफिक पुलिस को सख्त कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए एंटी-स्मॉग गन, अतिरिक्त वाटर टैंकर और ग्रीन नेट का उपयोग बढ़ाया जाएगा। निर्माण कंपनियों को नियमित छिड़काव और मलबा हटाने के लिए बाध्य किया जाएगा, अन्यथा कार्रवाई तय है। शहरभर में निगरानी के लिए एक विशेष प्रवर्तन इकाई बनाई जाएगी, जो मौके पर ही चालान और दंडात्मक कार्रवाई करेगी।
बैठक में अपर नगर आयुक्त ललित कुमार, पंकज कुमार श्रीवास्तव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, जलकल विभाग, सेतु निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने मिलकर बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर सहमति दी। नगर आयुक्त ने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी विभागों को टीम भावना से तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी, ताकि लखनऊवासी फिर से स्वच्छ हवा में सांस ले सकें।





