लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय अब डिजिटल युग में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। 105 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय में 1 अप्रैल से पूरी तरह पेपरलेस व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की समस्त प्रशासनिक कार्यप्रणाली डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से ई-ऑफिस सिस्टम लागू करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके तहत अब फाइलें, आदेश, निर्देश और पत्राचार पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संचालित किए जाएंगे। इससे न केवल कामकाज में पारदर्शिता आएगी, बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होगी।
विश्वविद्यालय में फरवरी और मार्च माह के दौरान पुरानी फाइलों की स्कैनिंग और कोडिंग का कार्य किया गया। इन दस्तावेजों को डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी रिकॉर्ड तक आसानी से पहुंचा जा सके।
विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देश पर इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी विभागों, संकायों और कार्यालयों को आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों को डिजिटल प्रणाली के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है।
नई पेपरलेस व्यवस्था के लागू होने के बाद फाइलों में छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे जवाबदेही तय करना आसान होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यों में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय का यह निर्णय “डिजिटल इंडिया” अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 105 साल पुराने इस प्रतिष्ठित संस्थान में डिजिटल कार्यप्रणाली की शुरुआत उच्च शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी बदलाव का स्पष्ट संकेत है।


