अनुराग तिवारी
औरैया। जिले में एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था की जमीनी हकीकत अब सामने आ रही है, जो सरकारी दावों और वास्तविकता के बीच के अंतर को साफ उजागर करती है। डिजिटल इंडिया और उपभोक्ता सुविधा के दावे कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं, जबकि आम जनता सहकारी गैस एजेंसी की कार्यशैली से परेशान होकर सवाल उठाने को मजबूर है।
उपभोक्ताओं के अनुसार, उन्होंने गैस बुकिंग ऑनलाइन माध्यम और मोबाइल ऐप के जरिए की, लेकिन जब एजेंसी पर सिलेंडर लेने पहुंचे तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया गया कि “DAC (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) नहीं आया है, इसलिए गैस नहीं मिलेगी।”
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बुकिंग पूरी तरह कन्फर्म होने के बावजूद उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है। सवाल सीधा है — जब तकनीकी खामी सिस्टम की है, तो उसकी सजा उपभोक्ताओं को क्यों दी जा रही है?
सहकारी गैस एजेंसी पर सिर्फ गैस न देने के आरोप ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि समस्या बताने पर उन्हें समाधान नहीं, बल्कि अभद्रता और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। “DAC नहीं तो गैस नहीं” का रवैया अपनाकर कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
वहीं, इसी जिले में संचालित दर्शन सिंह गैस एजेंसी पूरी तरह अलग तस्वीर पेश कर रही है। यहां उपभोक्ताओं को बिना अनावश्यक अड़चनों के गैस उपलब्ध कराई जा रही है। DAC जैसी तकनीकी समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है और ग्राहकों के साथ विनम्र व्यवहार किया जाता है।
एक ही जिले में दो अलग-अलग कार्यशैलियां यह साबित करती हैं कि समस्या नियमों या सिस्टम में नहीं, बल्कि नीयत और जिम्मेदारी में है। जहां एक एजेंसी सेवा का उदाहरण बन रही है, वहीं दूसरी एजेंसी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
इस पूरे मामले के बीच एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है — शादी, विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में गैस की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित होगी? जब नियमित उपभोक्ताओं को ही समय पर गैस नहीं मिल पा रही, तो विशेष अवसरों पर अतिरिक्त सिलेंडर की व्यवस्था कैसे होगी? ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसे मौकों पर या तो महंगे दामों पर निजी इंतजाम करना पड़ता है या फिर कार्यक्रमों में असुविधा झेलनी पड़ती है। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि गैस वितरण व्यवस्था में न केवल सुधार की जरूरत है, बल्कि विशेष अवसरों के लिए भी स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
औरैया में गैस एजेंसियों की यह दोहरी तस्वीर अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ सकता है।
यूथ इण्डिया समाचार के ज्वाइंट एडिटर ने फोन द्वारा राजेश पटेल (जिला खाद्य पूर्ति अधिकारी, औरैया) से चर्चा की, उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि जनहित में सभी गैस एजेंसियों को निर्देशित किया गया है कि उपभोक्ताओं को नियमानुसार बिना किसी परेशानी के सेवा दी जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई एजेंसी उपभोक्ताओं के साथ गलत व्यवहार, अभद्र भाषा या सेवा में लापरवाही करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।


