अगले महीने फिर बढ़ोतरी के संकेत
नई दिल्ली।देशभर में रसोई गैस (एलपीजी ) की किल्लत और महंगाई के बीच अब आम लोगों पर एक और आर्थिक बोझ बढ़ता नजर आ रहा है। गैस सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती कीमतों के कारण लोग तेजी से इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाते हुए बाजार में इंडक्शन चूल्हों की कीमतें अचानक दोगुनी तक पहुंच गई हैं।
जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में इंडक्शन कुकर की मांग में भारी उछाल आया है। जहां पहले ₹1500 से ₹2500 तक मिलने वाले सामान्य इंडक्शन चूल्हे अब ₹3000 से ₹5000 तक बेचे जा रहे हैं। कई ब्रांड्स और स्थानीय विक्रेताओं ने कीमतों में 40 से 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है।
व्यापारियों का कहना है कि मांग बढ़ने के साथ-साथ कच्चे माल की लागत और सप्लाई चेन में दिक्कतों के कारण कीमतों में इजाफा हुआ है। वहीं बाजार सूत्रों के अनुसार, कंपनियां अगले महीने फिर से कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ गई है।
एलपीजी की किल्लत के चलते ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग वैकल्पिक साधनों की तलाश कर रहे हैं। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे परिवार तेजी से इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जिससे बाजार में अचानक मांग का दबाव बन गया है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि एक ओर गैस सिलेंडर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और समय पर उपलब्ध भी नहीं हो पा रही हैं, वहीं दूसरी ओर इंडक्शन जैसे विकल्प भी महंगे होते जा रहे हैं। ऐसे में रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एलपीजी सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई और बाजार में कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में किचन से जुड़ी वस्तुओं की महंगाई और बढ़ सकती है।
एलपीजी संकट और इंडक्शन चूल्हों की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की रसोई पर दोहरी मार डाल दी है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती हैं, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।


