नई दिल्ली| संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त तकरार देखने को मिली। कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जहां चीन सीमा विवाद को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर रहे, वहीं भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। इसी मुद्दे पर एक दिन पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष रखा था और मंगलवार को वे लोकसभा में इस समझौते पर बयान देने के लिए खड़े हुए।
पीयूष गोयल के संबोधन के दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। टेबल पीटकर विरोध जताया गया, नारेबाजी हुई और कई सांसद वेल में आ गए। विपक्षी सांसदों की मांग थी कि राहुल गांधी को बोलने का अवसर दिया जाए। हंगामे के बीच कुछ सांसद हाथों में पोस्टर लेकर भी नजर आए, जिससे सदन का माहौल और गरमा गया।
इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष को कड़ी नसीहत दी। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि क्या इस तरह का आचरण उन्हें शोभा देता है। स्पीकर ने साफ शब्दों में कहा कि विपक्षी सांसद सदन की मर्यादा और गरिमा तोड़ रहे हैं और इस तरह के आचरण से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि विरोध का भी एक तरीका होता है और असहमति तर्कों तथा तथ्यों के आधार पर दर्ज कराई जानी चाहिए, न कि नारेबाजी और पोस्टर दिखाकर।
ओम बिरला ने यह भी कहा कि लंबे समय तक सरकार में रहने का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ सांसदों से सदन को अनुशासित आचरण की अपेक्षा होती है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि नियमों का उल्लंघन कर सरकार को झुकाया नहीं जा सकता। विरोध शब्दों और तर्कपूर्ण दलीलों से होता है, न कि वेल में आकर हंगामा करने से।
लगातार बढ़ते शोर-शराबे के कारण कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित रही। बजट सत्र के दौरान चीन सीमा विवाद और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर हो रहे इस टकराव ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में संसद का माहौल और अधिक गरमाने वाला है।






