फर्रुखाबाद। श्री पांडेश्वर नाथ मंदिर में मानस विचार समिति द्वारा 37 वे मानस सम्मेलन में श्री राम जानकी विवाह को आदर्श विवाह कहा गया वहीं वर्तमान समय में लुप्त होते संस्कारों के संरक्षण पर बल दिया गया। पारिवारक व सामाजिक विधटन रोकनऔर अपनी संस्कृति बचाने के लिए मानस के संदेश एवं आदेशों के पालन पर जोर दिया गया।
सम्मेलन में पंडित अरुण गोस्वामी (झांसी ) में गोस्वामी तुलसीदास के मानस के अंत में भारतीय संस्कृति में चार विवाहों का उल्लेख किया शिव विवाह श्री राम विवाह जिसमें ऋषियों द्वारा संपन्न कराया गया उनके आदर्श विवाह बताया जो मानव जीवन में सफल हुए दो विवाह ऐसे हुए जो असफल रहे नारद विवाह एवं सूप नखा का विवाह जो संस्कारों से दूर रहे वर्तमान समय में जो विवाह पद्धति लव रिलेशनशिप के साथ हो रहे हैं इसी लिए थोड़ा समय में विघटन हो जाते हैं। मानव जीवन में तनाव और पति पत्नी और अशांति में जीते हैं श्री राम जी का विवाह आदर्श विवाह है जिसमें भारतीय संस्कृति के संस्कार हैं लोक जीवन है परिवार और समाज का आनंद है अपनी-अपनी विचार प्रस्तुत किया
मानस विदुषीश्रीमती संध्या दीक्षित ( मध्य प्रदेश ) ने अवधि ब्रजभाषा बुंदेलखंड के लोक गीत गए गोस्वामी तुलसीदास के मानस की चौपाइयों के द्वारा श्री राम सीता जी का विवाह ‘गीत संगीत और जीवन में आनंद रस के साथ मंगल गीत विवाह गीत प्रेम रस के गीत विदाई गीत भारतीय संस्कृतिके संस्कारों को जागृत किया श्रोताओं ने लोक जीवन का पूरा आनंद उठाया सम्मेलन संयोजक डॉक्टर रामबाबू पाठक ने सभी वक्ताओं एवं विद्वान जनों का सम्मान किया।
श्रीमती संध्या दीक्षित कुमारी आस्था शर्मा विजयलक्ष्मी शोभित स्मृति रजनी लौगवानी आलव्या महिलाओं ने लोक गीत विवाह गीत श्री राम जी की बारात अवध से मिथिला चली
राघवेंद्र श्री राम दूल्हा बने राघवेंद्र सरकार आज
मिथिला नगरी निहाल सखिया गाओ मंगल गीत आज मिथिला नगरी निहाल
झुकी जइयो रघुवीर लली मेरी छोटी है
अशोक रस्तोगी बृज किशोर सिंह किशोर सुजीत पाठक विशेष पाठक ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री अनुराग सक्सैना संजय गर्ग अभी शुक्ला हर्षित दीक्षित उत्कर्ष दीक्षितअद्भुत पाठक रविंद्र भदोरिया सर्वेश अवस्थी सदानंद शुक्ला आलोक गौड़ आदि
कार्यक्रम का संचालन रामेंद्र नाथ मिश्रा ने किया





