डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय की पैथोलॉजी लैब में तकनीकी खराबी, प्रिंटर मशीन बंद होने से ठप हुई जांच रिपोर्ट वितरण व्यवस्था, मरीज हुए परेशान

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फर्रुखाबाद। शहर के प्रमुख सरकारी अस्पताल डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय की पैथोलॉजी लैब में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक प्रिंटर मशीन खराब हो जाने के कारण सैकड़ों मरीजों की जांच रिपोर्ट समय से नहीं मिल सकी। रिपोर्ट न मिलने से मरीजों के सही और समय पर उपचार में भारी बाधा उत्पन्न हो गई, जिससे अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों को खासा परेशान होना पड़ा।
बताया जा रहा है कि पैथोलॉजी लैब में रोजाना सैकड़ों मरीजों के खून, पेशाब और अन्य जांच संबंधी सैंपल लिए जाते हैं। जांच के बाद उनकी रिपोर्ट प्रिंटर मशीन के माध्यम से निकाली जाती है, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते प्रिंटर मशीन पूरी तरह बंद हो गई। इसके चलते तैयार हो चुकी जांच रिपोर्ट भी मरीजों को उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
जांच रिपोर्ट न मिलने के कारण डॉक्टर भी मरीजों को सही दवा और उपचार नहीं बता सके। कई मरीज घंटों तक पैथोलॉजी विभाग के बाहर रिपोर्ट के इंतजार में बैठे रहे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, मरीजों की बेचैनी बढ़ती चली गई। कुछ गंभीर मरीजों को बिना पूरी जांच रिपोर्ट के अस्थायी उपचार देकर आगे की तारीख देनी पड़ी।
अस्पताल में इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज के इलाकों से आए मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ी। कई मरीज सुबह-सुबह अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन रिपोर्ट न मिलने के कारण उन्हें बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा। मरीजों और तीमारदारों ने बताया कि इलाज के लिए आने-जाने में समय और पैसा दोनों खर्च होता है, ऐसे में इस तरह की लापरवाही से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
रिपोर्ट न मिलने से नाराज तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यदि मशीनें समय पर ठीक रखी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्था पहले से मौजूद हो, तो मरीजों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। कुछ तीमारदारों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में अक्सर तकनीकी खामियों के कारण इसी तरह की समस्याएं सामने आती रहती हैं।
इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक बड़े सरकारी अस्पताल में पैथोलॉजी जैसी अहम सेवा का तकनीकी कारणों से ठप हो जाना कहीं न कहीं अधिकारियों की लापरवाही की ओर इशारा करता है। मरीजों का कहना है कि ऐसी स्थिति में तुरंत वैकल्पिक प्रिंटर की व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन घंटों तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया।
मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान करे, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को जांच रिपोर्ट के अभाव में इलाज से वंचित न होना पड़े। साथ ही मशीनों की नियमित देखरेख और तकनीकी स्टाफ की तैनाती भी सुनिश्चित की जाए।

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