फर्रुखाबाद। जनपद के प्रमुख सरकारी अस्पताल डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय के मुख्य गेट पर इन दिनों ई-रिक्शा चालकों का अवैध जमावड़ा मरीजों और एंबुलेंस सेवाओं के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनता जा रहा है। अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार अक्सर ई-रिक्शाओं से घिरा रहता है, जिससे आपातकालीन सेवाएं बाधित हो रही हैं और कई बार एंबुलेंस को अस्पताल परिसर के अंदर प्रवेश करने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल के बाहर दिनभर जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। खासकर सुबह और शाम के समय जब मरीजों की संख्या अधिक होती है, उस वक्त ई-रिक्शा चालक सवारियां बैठाने और उतारने के लिए मुख्य गेट के बिल्कुल सामने अपने वाहन खड़े कर देते हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि गंभीर मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस भी समय पर अस्पताल के भीतर नहीं पहुंच पाती।
इस समस्या को देखते हुए कई बार सत्येंद्र कुमार द्वारा यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अभियान चलाया गया। इस दौरान ई-रिक्शा चालकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई भी की गई और उन्हें मुख्य गेट से दूर खड़े रहने की चेतावनी दी गई। इसके बावजूद ई-रिक्शा चालकों के रवैये में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। कार्रवाई के कुछ समय बाद स्थिति फिर वही हो जाती है।
यातायात विभाग का कहना है कि लगातार समझाने और चालान किए जाने के बाद भी चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे यह समस्या लगातार बनी हुई है।
अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि कई बार एंबुलेंस को भी गेट पर रुकना पड़ता है, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ने का खतरा बना रहता है। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि जाम के कारण उन्हें अपने मरीज को स्ट्रेचर पर काफी दूर तक पैदल ले जाना पड़ा, जिससे परेशानी और बढ़ गई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की अव्यवस्था बेहद चिंताजनक है।
आम जनता और समाजसेवी संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल के मुख्य गेट के पास ई-रिक्शाओं के खड़े होने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए और इसके लिए अलग से स्टैंड निर्धारित किया जाए। साथ ही, यह भी मांग उठ रही है कि यातायात पुलिस द्वारा नियमित रूप से गश्त कर सख्ती बरती जाए ताकि एंबुलेंस और मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
लोगों का कहना है कि अस्पताल में दूर-दराज से गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं, ऐसे में एक-एक मिनट कीमती होता है। यदि एंबुलेंस समय पर अस्पताल के अंदर नहीं पहुंच पाएगी, तो मरीज की जान पर बन सकती है।
हालांकि यातायात प्रभारी द्वारा समय-समय पर अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाता है और आमजन तथा मरीजों को कब तक इससे राहत मिलती है।





