फर्रुखाबाद। महारानी अवंतीबाई की जयंती पर फर्रुखाबाद में आयोजित लोधी समाज सम्मेलन में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब समाज के कई बड़े नेताओं और सांसदों ने कार्यक्रम से दूरी बना ली।
केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने सम्मेलन में शामिल होकर समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया और महारानी अवंतीबाई की जयंती को धूमधाम से मनाने का आह्वान किया। हालांकि वह कार्यक्रम में 4 घंटे बाद विलंब से पहुंचे जिसको लेकर भी लोगों में संतोष फैला वहीं पूर्व सपा विधायक ने अपने राजनीतिक दर्द का जिक्र करते हुए समाज से आगे बढ़ने और शिक्षा पर ध्यान देने की बात कही।
हालाँकि, इस आयोजन से लोधी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उन्नाव सांसद डॉ. सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज समेत समाज के कई दिग्गज नेताओं ने किनारा कर लिया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में बाबू कल्याण सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की उपेक्षा को लेकर नाराजगी जताई गई।
बीजेपी सांसद मुकेश राजपूत ने बहिष्कार, बोले—“यह लोग भाजपा विरोधी”
फर्रुखाबाद 26 अगस्त को फर्रुखाबाद में हुए लोधी समाज सम्मेलन को लेकर अब राजनीति तेज हो गई है। तीसरी बार बीजेपी सांसद मुकेश राजपूत ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए कहा कि जिन मंचों पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और उमा भारती का अपमान किया जाए, वहां जाना उचित नहीं।
सांसद का कहना था कि समाज की एकजुटता के नाम पर आयोजित यह कार्यक्रम वास्तव में राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है और इसमें शामिल कुछ लोग लगातार भाजपा विरोधी रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन चेहरों ने 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में भाजपा का विरोध किया है।
सांसद ने साफ कहा कि वह ऐसे किसी मंच का हिस्सा नहीं हो सकते जहाँ समाज के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं का सम्मान न हो। उन्होंने संगठन और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सच्चे और ईमानदार नेतृत्व के साथ खड़े हों, न कि भ्रम फैलाने वालों के साथ।
लोधी सम्मेलन से उठी राजनीति, अंदरूनी नाराज़गी ने बढ़ाई भाजपा की चिंता
फर्रुखाबाद। महारानी अवंतीबाई जयंती पर हुए लोधी समाज सम्मेलन ने न सिर्फ समाज की एकजुटता बल्कि भाजपा की आंतरिक राजनीति को भी उजागर कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र और एटा से पूर्व सांसद राजवीर सिंह (राजू भैया) समेत तमाम दिग्गज लोधी नेता अंदरखाने नाराज़ चल रहे हैं। यही कारण रहा कि कई वरिष्ठ नेता इस प्रायोजित कार्यक्रम से आयोजन से दूरी बनाए रहे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस नाराजगी को शांत करने के लिए केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा को आगे कर समाज को साधने की कोशिश की है। बीएल वर्मा ने सम्मेलन में शामिल होकर समाज को एकजुट रहने का संदेश भी दिया।
हालाँकि, लोधी समाज में फैला असंतोष और उपेक्षा की भावना आने वाले समय में भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है। अगर यह नाराजगी गहराई तो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।
लोधी सम्मेलन पर सियासी तकरार—बड़े नेताओं ने किया किनारा, ‘भीतरखाने नाराज़गी’ से बीजेपी की चिंता बढ़ी
कानपुर/लखनऊ। फर्रुखाबाद में हुए लोधी समाज सम्मेलन को लेकर सियासत तेज हो गई है। खबर है कि लोधी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उन्नाव सांसद डॉ. सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज समेत समाज के कई दिग्गज नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बनाई। भाजपा के एक सांसद ने तो कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए इसे “भाजपा विरोधी चेहरों” का मंच बताया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र व एटा के पूर्व सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ सहित कई प्रभावशाली लोधी नेताओं में अंदरूनी नाराज़गी बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि इसी असंतोष को बैलेंस करने के लिए पार्टी ने केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा को सक्रिय रूप से आगे किया है, ताकि संदेश जाए कि शीर्ष नेतृत्व लोधी समाज के साथ खड़ा है।
हालाँकि, यह भी आकलन सामने आ रहा है कि यदि यह नाराज़गी लंबी चली, तो पश्चिमी–मध्य यूपी की उन सीटों पर असर दिख सकता है जहाँ लोधी मतदाता निर्णायक हैं—खासकर एटा, फर्रुखाबाद, कासगंज, कानपुर देहात, उन्नाव, हरदोई, मैनपुरी, इटावा, कन्नौज आदि में।
बीजेपी के लिए चुनौती दोहरी दिख रही है—एक तरफ समाज के भीतर सम्मान और हिस्सेदारी को लेकर उठ रहे सवाल, दूसरी तरफ विपक्ष की कोशिशें कि इस असंतोष को संगत नैरेटिव देकर वोट ट्रांसफर में बदला जाए। विश्लेषकों के अनुसार, यदि स्थानीय नेतृत्व को पर्याप्त स्पेस, सम्मानजनक सहभागिता और स्पष्ट राजनीतिक रोडमैप न मिला, तो “मौन असंतोष” कम वोट शेयर, लो-टर्नआउट या स्प्लिट वोट की शक्ल ले सकता है।
उधर, समर्थक खेमे का तर्क है कि बी.एल. वर्मा जैसे वरिष्ठ चेहरे की पहल से संवाद बहाल होगा और नेतृत्व स्तर पर भरोसा बढ़ेगा। परंतु यह कितनी दूर तक जाता है, इसका अंदाज़ा आगामी राजनीतिक कैलेंडर—नगर निकाय/उपचुनाव–2026, विधानसभा–2027 और लोकसभा–2029—में दिखेगा।
कुल मिलाकर, फर्रुखाबाद का यह सम्मेलन लोधी समाज की सामाजिक ऊर्जा का प्रदर्शन होने के साथ-साथ भाजपा के लिए माइक्रो-मैनेजमेंट बनाम सम्मानजनक साझेदारी की कसौटी भी बन गया।