लखनऊ। राजधानी लखनऊ में एक बार फिर अवैध निर्माण का मामला सुर्खियों में है। गोमती नगर के सेक्टर-4 स्थित एडीसी टावर में बिल्डर प्रवीण साहू ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को खुली चुनौती देते हुए सील की गई इमारत का ताला तोड़कर दोबारा निर्माण कार्य शुरू करा दिया।
बताया जा रहा है कि एलडीए द्वारा कार्रवाई के बाद भवन को सील किया गया था, लेकिन बिल्डर प्रवीण साहू ने न सिर्फ सील तोड़ी, बल्कि सीलिंग के निशान तक मिटवाकर पेंट करा दिया, ताकि कार्रवाई के सबूत ही खत्म हो जाएं। यह पूरा घटनाक्रम एलडीए की कार्यप्रणाली और उसकी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अफसरों के संरक्षण में बेखौफ बिल्डर?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रवीण साहू का यह कदम यूं ही संभव नहीं माना जा रहा। आरोप है कि एलडीए के कुछ अधिकारियों का संरक्षण मिलने के कारण ही बिल्डर इतने बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। यही वजह है कि सील तोड़े जाने के बाद भी अब तक कोई सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है।
मिलीभगत से बनी अवैध बिल्डिंग
जानकारी के मुताबिक एडीसी टावर का निर्माण एलडीए अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया था। निर्माण के दौरान न तो तय मानकों का पालन किया गया और न ही जरूरी स्वीकृतियों की पूरी प्रक्रिया अपनाई गई। शिकायतें सामने आने के बाद एलडीए ने औपचारिक कार्रवाई करते हुए भवन को सील तो कर दिया, लेकिन वह कार्रवाई कागज़ों तक सीमित रह गई।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सील तोड़ने के बावजूद अब तक FIR क्यों नहीं?जिम्मेदार LDA अधिकारियों पर कार्रवाई कब?अवैध निर्माण पर ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे कहां गए?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी बिल्डर व संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

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