19 जनवरी को अगली सुनवाई
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गोमती नगर स्थित सहारा इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड से वापस ली गई भूमि के उपयोग को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और नगर निगम से स्पष्ट जवाब तलब किया है। न्यायालय ने दोनों संस्थाओं से यह बताने को कहा है कि उक्त भूमि का भविष्य में किस उद्देश्य से और किस योजना के तहत उपयोग किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस आदेश से सहारा इंडिया के कानूनी अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि भूमि की वापसी के संबंध में सहारा की ओर से दायर याचिका पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी को निर्धारित की गई है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने गोमतीनगर जन कल्याण महासमिति द्वारा वर्ष 2008 में दायर जनहित याचिका पर पारित किया। सुनवाई के दौरान याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बीके सिंह ने कोर्ट को अवगत कराया कि जो भूमि पूर्व में सहारा के कब्जे में थी, उसे अब एलडीए और नगर निगम ने पुनः अपने अधिकार में ले लिया है। उन्होंने दलील दी कि मास्टर प्लान में पूरी भूमि को ग्रीन बेल्ट के रूप में चिह्नित किया गया है, इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित प्राधिकरण उसका किस प्रकार उपयोग करना चाहते हैं।
वहीं, याचिका का विरोध करते हुए सहारा इंडिया की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित पूरी भूमि ग्रीन बेल्ट के रूप में चिह्नित नहीं है। सहारा ने यह भी कहा कि नगर निगम और एलडीए द्वारा भूमि पर दोबारा कब्जा किए जाने को उसने अलग याचिका के माध्यम से चुनौती दी है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। इस पर खंडपीठ ने जनहित याचिका और सहारा की याचिका को आपस में संबद्ध करते हुए एक साथ सुनवाई करने का आदेश दिया।
मामले को लेकर अब सभी की निगाहें 19 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस भूमि के भविष्य और उसके उपयोग को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।






