फर्रुखाबाद| नगर पालिका क्षेत्र में आवारा गोवंश की समस्या दिन-ब-दिन विकराल रूप लेती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी उदासीन बने हुए हैं। शहर की प्रमुख सड़कों, बाजारों और सरकारी कार्यालयों के आसपास खुलेआम घूमते गोवंश न केवल यातायात व्यवस्था को बाधित कर रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। कई बार यह गोवंश अचानक सड़कों पर दौड़ पड़ते हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कलेक्ट्रेट और विकास भवन जैसे अति महत्वपूर्ण और संवेदनशील सरकारी परिसरों के आसपास ही दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में गोवंश सड़कों पर टहलते नजर आते हैं। इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग आते-जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठता दिखाई नहीं देता।
प्रशासन द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि आवारा गोवंश को गौशालाओं में भेजा जा रहा है और उनके लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। नगर क्षेत्र में गोवंशों की बढ़ती संख्या यह साफ दर्शाती है कि न तो इन्हें पकड़ने के लिए प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है और न ही गौशालाओं में पर्याप्त स्थान उपलब्ध है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग केवल कागजों में योजनाएं चला रहा है, जबकि धरातल पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
रात के समय यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जब सड़कों पर झुंड के रूप में बैठे और घूमते गोवंश अंधेरे में दिखाई नहीं देते और वाहन चालक अचानक उनके सामने आ जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। कई छोटे-बड़े हादसे भी इस कारण हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस और स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के सबसे महत्वपूर्ण और वीआईपी क्षेत्रों—कलेक्ट्रेट और विकास भवन—के आसपास ही यह हालात हैं, तो शहर के अन्य मोहल्लों और बाहरी इलाकों की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगर पालिका की यह लापरवाही न केवल प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह स्थिति और भी भयावह रूप ले सकती है और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
नगर पालिका की लापरवाही उजागर: सड़कों पर घूम रहे सैकड़ों आवारा गोवंश, दावों की खुली पोल


