कानपुर: हाई-प्रोफाइल लैंबोर्गिनी केस (Lamborghini case) के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हासिल हुई है। पुलिस ने गुरुवार को तंबाकू कारोबारी (tobacco businessman) के.के. मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को कानपुर के वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को हुई दुर्घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। करोड़ों रुपये की इस लग्जरी लैंबोर्गिनी कार की टक्कर में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और पूरे शहर में सनसनी फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि कार बेहद तेज रफ्तार से चल रही थी जब वह अनियंत्रित होकर कई लोगों से टकरा गई।
घटना के बाद, इस बात पर विवाद खड़ा हो गया कि दुर्घटना के समय वाहन कौन चला रहा था। शिवम मिश्रा के परिवार ने दावा किया कि उनका ड्राइवर मोहन गाड़ी चला रहा था। बुधवार को मोहन नाम के एक व्यक्ति ने अदालत में आत्मसमर्पण करने की कोशिश की और दुर्घटना की जिम्मेदारी ली। हालांकि, पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी सबूतों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। घटनास्थल से वायरल हुए वीडियो में कथित तौर पर शिवम मिश्रा को दुर्घटना के तुरंत बाद ड्राइवर की सीट से उतरते हुए दिखाया गया है। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से कथित तौर पर पुष्टि हुई है कि शिवम गाड़ी चला रहा था।
पुलिस को शक है कि असली आरोपी को बचाने के लिए एक फर्जी ड्राइवर को पेश किया गया था। के.के. मिश्रा के सार्वजनिक बयानों के बावजूद कि उनका बेटा उस समय इलाज के लिए दिल्ली में था, निगरानी टीमों ने शिवम की लोकेशन कानपुर में ट्रैक की, जिसके बाद गुरुवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। शिवम मिश्रा को अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है, जहां पुलिस आगे की जांच के लिए उसकी रिमांड मांग सकती है। अब उन व्यक्तियों पर सवाल उठ रहे हैं जिन्होंने कथित तौर पर आरोपी को बचाने के लिए हलफनामे दाखिल किए हैं। जांच जारी है।


