नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav) ने IRCTC होटल रखरखाव अनुबंध मामले में अपने और अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में चुनौती दी है। याचिका में सीबीआई की विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है जिसमें वरिष्ठ राजनेता के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया सबूत पाए गए थे।
लालू यादव की कानूनी टीम का तर्क है कि अभियोजन पक्ष के पास आवश्यक मान्यताएं नहीं हैं और आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं। यह मामला, जिसे आमतौर पर IRCTC घोटाला के नाम से जाना जाता है, यादव के केंद्रीय रेल मंत्री के कार्यकाल (2004-2009) से संबंधित है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि दो IRCTC होटलों – बीएनआर रांची और बीएनआर पुरी – के रखरखाव अनुबंध एक निजी कंपनी, सुजाता होटल्स को देने में बड़ी अनियमितताएं थीं।
केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, पटना में 3 एकड़ के एक प्रीमियम व्यावसायिक भूखंड के बदले निविदा प्रक्रिया में धांधली की गई थी। आरोप है कि यह जमीन यादव परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली एक फर्जी कंपनी को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर हस्तांतरित कर दी गई थी। सीबीआई ने 2018 में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव और कई पूर्व रेलवे अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में यादव ने तर्क दिया है कि निचली अदालत का आरोप तय करने का निर्णय “यांत्रिक” था और इसमें इस बात पर विचार नहीं किया गया कि कोई प्रत्यक्ष सबूत उन्हें कथित लेन-देन से नहीं जोड़ता है। उनके वकील ने तर्क दिया है कि होटलों से संबंधित प्रशासनिक निर्णय IRCTC बोर्ड द्वारा लिए गए थे, न कि सीधे मंत्री के कार्यालय द्वारा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले के मनी लॉन्ड्रिंग पहलुओं की समानांतर जांच भी कर रहा है और यादव परिवार से जुड़ी कई संपत्तियों को पहले ही जब्त कर चुका है।
यह कानूनी घटनाक्रम आरजेडी प्रमुख के लिए एक संवेदनशील समय पर आया है, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और विपक्ष के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बने हुए हैं। यादव फिलहाल चारा घोटाला के अलग-अलग मामलों में जमानत पर बाहर हैं, वहीं IRCTC मामला उनके परिवार के लिए एक बड़ी कानूनी बाधा है, क्योंकि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी सह-आरोपी हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई 5 जनवरी को होनी है, जहां न्यायालय यह तय करेगा कि निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई जाए या मुकदमे को जारी रहने दिया जाए।


