जम्मू| लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में हिंसा अचानक नहीं भड़की, बल्कि इसे स्थानीय लोग एक सुनियोजित साजिश बता रहे हैं। शांतिपूर्ण धरने में बाहरी तत्वों की घुसपैठ की आशंका जताई जा रही है।
वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख के लोग लगातार अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। नौकरियों, जमीन, संस्कृति और संसाधनों पर अधिकार के मुद्दे पर असंतोष बढ़ता रहा। हालांकि केंद्र सरकार ने इस साल मई में निवास प्रमाणपत्र नीति लागू कर रोजगार की समस्या सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय संगठनों ने इसे अधूरा बताया और लद्दाख लोक सेवा आयोग व कर्मचारी चयन आयोग की मांग तेज कर दी।
पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने आंदोलन की कमान संभालते हुए भूख हड़ताल शुरू की। उनकी अगुवाई में यह आंदोलन अब तक शांतिपूर्ण था, लेकिन बुधवार को अचानक कुछ युवाओं ने हिंसक रुख अख़्तियार कर लिया। गौरतलब है कि आंदोलनकारी संगठनों लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक मोर्चा की केंद्रीय गृह मंत्रालय से 25 सितंबर को बैठक तय थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किन लोगों ने बातचीत के रास्ते को बाधित करने की कोशिश की।
सूत्रों के अनुसार, आंदोलन के दौरान लेह एपेक्स बॉडी के युवा प्रकोष्ठ के गुस्से को कुछ लोगों ने भड़काने का प्रयास किया। कांग्रेस पार्षद फुटसोग स्टेंजिन पर भाजपा ने हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा नेताओं ने कांग्रेस को साजिश का जिम्मेदार ठहराया। हालांकि सोनम वांगचुक का कहना है कि कांग्रेस का इतना असर लद्दाख में नहीं कि हजारों युवा सड़कों पर उतर आएं।




