लखनऊ। अटल जी की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम में कविता, राष्ट्रभाव और संवेदना का दुर्लभ संगम देखने को मिला। कुमार विश्वास की ओजस्वी और भावनात्मक कविताओं ने ऐसा समां बांधा कि सभागार मंत्रमुग्ध हो उठा। विशेष रूप से उनकी चर्चित प्रस्तुति ‘भवानी सुन लो राम कहानी’ ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ और राजनाथ सिंह कविता की हर पंक्ति में डूबते नजर आए। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने तालियों के साथ कवि का उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम की गरिमा को और ऊंचा किया।
इस अवसर पर कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी की प्रमुख उपस्थिति रही। साहित्य और राष्ट्रवाद के इस आयोजन में उनकी मौजूदगी को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वहीं बृजेश पाठक पूरे कार्यक्रम में छाए रहे और कविताओं पर उनकी सहज प्रतिक्रियाएं दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहीं। कार्यक्रम में नीरज सिंह भी मौजूद रहे।
कुमार विश्वास की कविताओं में रामकथा, राष्ट्रबोध और मानवीय संवेदना का जो संगम दिखा, उसने श्रोताओं को भावनात्मक यात्रा पर ले गया। कविता के माध्यम से इतिहास, आस्था और वर्तमान की चिंताओं को जोड़ने की उनकी कला ने एक बार फिर सिद्ध किया कि कविता केवल शब्द नहीं, बल्कि चेतना का स्वर होती है।
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने महसूस किया कि जब कविता सत्ता के शोर के बीच भी अपनी जगह बना लेती है, तब समाज की आत्मा और अधिक सशक्त होती है। यह आयोजन न केवल अटल जी की स्मृति को समर्पित रहा, बल्कि हिंदी कविता की जीवंत परंपरा का भी सशक्त उत्सव बन गया।


