फर्रुखाबाद। ठंडी सड़क, अल्लाहनगर बढ़पुर क्षेत्र में स्थित चर्चित केएम हाउस होटल और केएम इंडिया शोरूम एक बार फिर सुर्खियों में हैं। तालाब और कब्रिस्तान की सरकारी भूमि पर निर्मित बताए जा रहे इन दोनों व्यावसायिक भवनों पर सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कार्रवाई न होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। तीन वर्ष तक चली सुनवाई, हाईकोर्ट में अपील और नियत प्राधिकारी बोर्ड की जांच के बाद छह नवंबर 2025 को ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश पारित किया गया था।
तीन वर्ष चली कानूनी लड़ाई, कई बार हुई सुनवाई
शहर के अल्लाहनगर बढ़पुर स्थित तालाब की भूमि पर केएम हाउस होटल और केएम इंडिया शोरूम का निर्माण कराया गया था। जानकारी के अनुसार गौरव अरोड़ा, विवेक अरोड़ा, वरुण अरोड़ा, पंकज अरोड़ा और अखिलचंद्र अरोड़ा द्वारा इस भूमि पर 18 आवासीय भवनों के लिए नक्शे स्वीकृत कराए गए थे, लेकिन बाद में इनका व्यावसायिक उपयोग किया गया।
21 दिसंबर 2022 को तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने सभी 18 नक्शे निरस्त कर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। इसके खिलाफ भवन स्वामी हाईकोर्ट पहुंचे, जहां अपील खारिज हो गई। इसके बाद दोबारा याचिका दायर की गई। 17 अप्रैल 2023 को हुई सुनवाई में प्रशासन ने पक्ष रखा कि भूमि का भू-उपयोग कब्रिस्तान, तालाब व पजावा के रूप में दर्ज है, इसलिए स्वीकृत नक्शे निरस्त किए गए।
31 जुलाई 2023 के ध्वस्तीकरण आदेश के विरुद्ध भवन स्वामी नियत प्राधिकारी बोर्ड पहुंचे। बोर्ड ने 12 बार सुनवाई की और सहयुक्त नियोजक, संभागीय नियोजन खंड कानपुर से जांच कराई।
जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
29 मई 2025 को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में बताया गया कि केएम हाउस का लगभग 3255.44 वर्ग मीटर भाग कब्रिस्तान भूमि में तथा 361.71 वर्ग मीटर भाग आवासीय भू-उपयोग में आता है। वहीं पांच अगस्त 2025 को लागू महायोजना 2031 में यह भूखंड तालाब और जलाशय के रूप में दर्ज है।
महायोजना में भू-उपयोग के विपरीत निर्माण पाए जाने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल ने केएम हाउस और केएम इंडिया दोनों भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया।
एक माह में स्वयं तोड़ने का दिया गया था मौका
ध्वस्तीकरण आदेश में स्पष्ट कहा गया कि भवन स्वामी एक माह के भीतर स्वयं निर्माण ध्वस्त करा लें, अन्यथा नगर पालिका प्रशासन के माध्यम से बुलडोजर चलाकर निर्माण हटाया जाएगा और खर्च की वसूली राजस्व की भांति की जाएगी।
केएम हाउस का निर्माण लगभग 12 वर्ष पूर्व कराया गया था, जबकि केएम इंडिया का निर्माण करीब पांच वर्ष पहले हुआ। दोनों भवनों की अनुमानित कीमत 40 से 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
गुरुशरणम होटल पर चल चुका है बुलडोजर
इसी क्षेत्र में फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी माफिया डॉ. अनुपम दुबे का करीब 20 करोड़ रुपये कीमत का गुरुशरणम होटल भी बना था। जांच में भूमि कब्रिस्तान की पाई गई। गैंगस्टर कार्रवाई के दौरान 16 अक्टूबर 2023 को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर होटल ध्वस्त करा दिया था।
तीनों भवनों की सुनवाई सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में एक ही तिथि और समय पर चलती रही थी। ऐसे में अब यह प्रश्न उठ रहा है कि जब गुरुशरणम होटल पर त्वरित कार्रवाई हुई तो केएम हाउस और केएम इंडिया पर आदेश के बाद भी कार्रवाई लंबित क्यों है।
सरकारी भूखंडों पर प्लॉटिंग का खेल
अल्लाहनगर बढ़पुर क्षेत्र में पूर्व में भी कई सरकारी भूखंडों पर कागजों में हेराफेरी कर प्लॉटिंग किए जाने के आरोप लगे हैं। कीमती भूमि होने के कारण खरीदारों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया। यहां तक कि कुछ लेखपाल और कानूनगो द्वारा भी प्लॉट खरीदकर निर्माण कराने की चर्चा रही है। गुरुशरणम होटल की जांच के बाद अन्य भूखंडों की भी पड़ताल शुरू हुई, जिसमें कई निर्माण सरकारी भूमि पर पाए गए।
कार्रवाई में देरी से भड़का ब्राह्मण समाज
ध्वस्तीकरण आदेश जारी हुए तीन माह बीत जाने के बावजूद कार्रवाई न होने से ब्राह्मण समाज में तीखा आक्रोश व्याप्त है। समाज के लोगों का कहना है कि प्रशासन की कार्यशैली पक्षपातपूर्ण दिखाई दे रही है। उनका सवाल है कि जब अनुपम दुबे के होटल पर तत्काल बुलडोजर चलाया गया तो इन भवनों पर देरी क्यों?
कुछ लोगों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए “मोटा नजराना” लेने की चर्चा भी सार्वजनिक रूप से की है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन जनचर्चा ने प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
प्रशासन की साख दांव पर
महायोजना 2031 में स्पष्ट रूप से तालाब और जलाशय दर्ज भूमि पर अवैध निर्माण पाए जाने के बावजूद कार्रवाई में देरी से जिला प्रशासन की साख दांव पर लग गई है। शहर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन अपने आदेश को अमल में लाकर निष्पक्षता साबित करेगा या मामला लंबित ही रहेगा।
फिलहाल फर्रुखाबाद में यह प्रकरण कानून, प्रशासन और सामाजिक संतुलन की कसौटी बन गया है।





