फर्रुखाबाद। नगर पालिका फर्रुखाबाद हर वर्ष साफ-सफाई और आवारा गोवंश के रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा करती है, लेकिन शहर की जमीनी तस्वीरें उन दावों को पूरी तरह झूठा साबित कर रही हैं। हालात इतने बदतर हैं कि शहर की कड़ा सेंट्रल जेल रोड, छोटी जेल रोड और स्थानीय डिग्री कॉलेज के पास रोजाना कूड़े का अड्डा बने हुए हैं, जहां न तो सफाई नजर आती है और न ही गोवंश संरक्षण की कोई व्यवस्था।
ये क्षेत्र नगर पालिका की कार्यशैली की सच्ची कहानी बयां करते हैं। कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेरों के बीच आवारा गोवंश प्लास्टिक, पोलिथिन और सड़ी-गली गंदगी को अपना भोजन बनाने को मजबूर हैं। यह दृश्य न सिर्फ प्रशासन की घोर लापरवाही है, बल्कि गोवंश संरक्षण के नाम पर खर्च की जा रही भारी भरकम रकम पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका का ध्यान केवल कागजों पर योजनाएँ बनाने और करोड़ों के बजट दिखाने तक सीमित है। मैदान में न तो सफाई कर्मी दिखाई देते हैं और न ही कूड़ा उठाने की कोई नियमित व्यवस्था। शहर का कूड़ा ढेर बनकर सड़कों पर फैल रहा है, जिससे दुर्गंध, संक्रमण और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो शहर में स्वच्छता का ढांचा पूरी तरह ढह जाएगा। नगर पालिका द्वारा बनाए गए नियम सिर्फ फाइलों में कैद हैं, जबकि क्षेत्रीय अधिकारी मौके पर शायद ही कभी पहुंचते हों।
जनता ने मांग की है कि नगर पालिका तुरंत कड़ा एक्शन ले, कूड़ा निस्तारण के लिए स्थायी व्यवस्था बनाए, आवारा गोवंश को सुरक्षित गोशालाओं में स्थानांतरित किया जाए और इलाके में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।
फर्रुखाबाद के लोग अब कह रहे हैं कि—
“दावे बंद करो, काम शुरू करो… शहर को गंदगी से मुक्ति दिलाओ!”





