(यूथ इंडिया विशेष रिपोर्ट)
अनुराग तिवारी
औरैया | जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों फेरी वालों द्वारा घर-घर जाकर पुराने और टूटे-फूटे मोबाइल फोन खरीदने का सिलसिला तेजी से बढ़ रहा है। 300 से 500 रुपये में मोबाइल खरीदने वाले ये लोग आम जनता को यह विश्वास दिलाते हैं कि यह केवल कबाड़ का सौदा है, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर साइबर खतरे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, खराब मोबाइल में भी मौजूद मदरबोर्ड, डाटा स्टोरेज चिप, IC और IMEI नंबर जैसे हिस्से अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इनका उपयोग कर फर्जी मोबाइल तैयार करना, डाटा रिकवरी के माध्यम से निजी जानकारी निकालना और साइबर ठगी जैसे अपराधों को अंजाम देना संभव है।
यदि मोबाइल बेचने से पहले उसे पूरी तरह से फैक्ट्री रीसेट नहीं किया गया, तो उसमें मौजूद फोटो, बैंकिंग जानकारी, OTP और अन्य निजी डाटा गलत हाथों में पहुंच सकता है। इससे व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग और आर्थिक नुकसान दोनों हो सकते हैं।
पुलिस और साइबर सेल द्वारा ऐसे मामलों में समय-समय पर कार्रवाई की गई है, लेकिन इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाई हैं। ऐसे में आम नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।


