– वादी-गवाहों पर मंडराया जानलेवा खतरा
फर्रुखाबाद। जनपद और आसपास जिलों में एक बार फिर खौफ का माहौल गहराता दिख रहा है। माफिया अनुपम दुबे और उसके गिरोह को लेकर गंभीर आशंकाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों, पीड़ित पक्षों और सूत्रों का कहना है कि हालिया घटनाक्रमों के बाद माफिया तंत्र का मनोबल बढ़ा हुआ है और यदि प्रशासन ने समय रहते सख़्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में साजिश के तहत गंभीर आपराधिक घटनाएं और हत्याएं भी हो सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार, माफिया गैंग की नजर अब उन लोगों पर है जो किसी न किसी रूप में उसके खिलाफ खड़े रहे हैं। इनमें
माफिया के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने वाले वादी अदालतों में गवाही देने वाले या देने वाले संभावित गवाह और सामाजिक स्तर पर माफिया तंत्र के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोग
शामिल हैं। इन लोगों में भय व्याप्त है। कई पीड़ितों का कहना है कि उन्हें प्रत्यक्ष नहीं तो अप्रत्यक्ष रूप से डराने-धमकाने और दबाव बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।
जिले में यह चर्चा आम है कि माफिया गैंग द्वारा यह संदेश फैलाया जा रहा है कि उसके खिलाफ अब कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता। इस तरह की बातों से न केवल माफिया गैंग का हौसला बढ़ रहा है, बल्कि आम नागरिकों और पीड़ितों में कानून व्यवस्था को लेकर अविश्वास भी गहराता जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
पीड़ित पक्षों का आरोप है कि जब वे पुलिस या प्रशासन के पास शिकायत लेकर जाते हैं, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि
“सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कारण सीधे मुकदमा दर्ज करना संभव नहीं है।”
इस स्थिति ने वादी और गवाहों को और अधिक असुरक्षित महसूस कराने का काम किया है। लोगों का कहना है कि जब न मुकदमा दर्ज हो पा रहा है और न ही पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है, तो उनकी जान पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
माफिया के खिलाफ पहले मुखर रहे कई लोग अब सार्वजनिक रूप से सामने आने से बच रहे हैं।
अपनी दिनचर्या और रास्ते बदल रहे हैं,और किसी अनहोनी की आशंका में जीवन बिता रहे हैं,उनका कहना है कि यदि किसी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन और कानून व्यवस्था पर होगी।
कानून व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि वादी और गवाहों को सुरक्षित ना किया गया और बखेड़ा बनेंगे। हालांकि प्रशासन और पुलिस द्वारा
माफिया गैंग और उसके नेटवर्क पर लगातार निगरानी नहीं रखी गई
और शिकायतों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो जनपद में एक बार फिर माफिया का खौफ खुलकर सामने आ सकता है।
फिलहाल पूरे मामले में जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल साफ है क्या प्रशासन समय रहते हालात को संभालेगा, या फिर किसी बड़ी वारदात के बाद ही नींद खुलेगी?






