लखनऊ| किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में महिला रेजिडेंट से यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास के गंभीर आरोपों के मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। आरोपी डॉ. रमीज को शह देने वाले करीबियों की सूची तैयार की जा रही है, वहीं उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। केजीएमयू प्रशासन ने उन्हें मामले से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई है।
जांच एजेंसियां डॉ. रमीज के संपर्कों को खंगाल रही हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) में आरोपी की कई लोगों से बातचीत के साक्ष्य मिले हैं, जिनमें अधिकांश केजीएमयू की फैकल्टी से जुड़े बताए जा रहे हैं। पैथोलॉजी विभाग सहित संबंधित विभागों में कार्यरत चिकित्सकों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उनसे आरोपी और पीड़िता के संबंधों के बारे में पूछताछ की गई, हालांकि अधिकतर ने इस मामले की जानकारी से इनकार किया है।
जांच के दौरान डॉ. रमीज के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने वालों का भी ब्योरा जुटाया गया है। पुलिस अब यह पता लगाएगी कि किस उद्देश्य से आरोपी के खाते में धनराशि भेजी गई थी। साथ ही पीड़िता द्वारा शुरुआती स्तर पर जिन अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की गई थी, उनके भी बयान दर्ज किए जाएंगे। पैथोलॉजी और सीसीयू विभाग के अफसरों ने शिकायत पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की, इस पर भी जवाब तलब किया जाएगा।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ को भी जांच में सहयोग के लिए लगाया गया है। एसटीएफ धर्मांतरण के आरोपी छांगुर से डॉ. रमीज के संभावित कनेक्शन की जांच करेगी। यह पता लगाया जाएगा कि दोनों की मुलाकात कहां और किन परिस्थितियों में हुई। इसके अलावा आगरा में एमबीबीएस और एमडी के दौरान रमीज किन लोगों के संपर्क में था, डॉ. परवेज के साथ उसके संबंध क्या थे, इसकी भी गहन पड़ताल की जा रही है।
धर्मांतरण विवाद के बाद उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बृहस्पतिवार को पहली बार केजीएमयू परिसर पहुंचे। कलाम सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की निगरानी में मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने डॉक्टरों और स्टाफ से किसी भी प्रकार की हड़ताल न करने की अपील भी की।
इस बीच पैथोलॉजी के एचओडी डॉ. वाहिद अली को हटाए जाने को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि रूटीन प्रशासनिक रीशफलिंग है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि धर्मांतरण और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों के मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाई जाएगी।

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