लखनऊ| राजधानी स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) की महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास के मामले में गिरफ्तार आरोपी डॉ. रमीज और उसके पिता सलीमुद्दीन को लेकर पुलिस व खुफिया एजेंसियों की जांच लगातार गहराती जा रही है। छानबीन में पुलिस को डॉ. रमीज और उसके पिता की कई संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली है, जिससे मामले का दायरा अब आतंकी कनेक्शन तक पहुंचता नजर आ रहा है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार रमीज का पिता सलीमुद्दीन अवध क्षेत्र के कई जिलों में सक्रिय था। पुलिस को उसके बहराइच, बाराबंकी और बलरामपुर की यात्राओं के ठोस साक्ष्य मिले हैं। सलीमुद्दीन के मोबाइल फोन की गहन जांच में कई अहम जानकारियां और संदिग्ध संपर्क सामने आए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, डॉ. रमीज के संबंध में जांच एजेंसियों को यह जानकारी मिली है कि वह दिल्ली ब्लास्ट की आरोपी डॉ. शाहीन से एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस के दौरान मिला था। बताया जा रहा है कि उसी मुलाकात के बाद रमीज शाहीन की विचारधारा से प्रभावित हुआ। इस तथ्य के सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां आरोपी के संभावित आतंकी कनेक्शन को लेकर भी सक्रिय हो गई हैं और उसके पुराने संपर्कों तथा गतिविधियों की गहन पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के बाद से डॉ. रमीज प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में था। आरोप है कि उसने पीएफआई के माध्यम से कुछ वकीलों से कानूनी मदद भी मांगी थी। पुलिस द्वारा आरोपी के घर पर कुर्की के आदेश का नोटिस चस्पा किए जाने के बाद उसके करीबी लोगों ने उसे कोर्ट में समर्पण की सलाह दी थी। इसी सलाह के बाद रमीज लखनऊ पहुंचा, लेकिन इससे पहले कि वह कोर्ट में समर्पण कर पाता, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
जांच में यह भी सामने आया है कि रमीज सबसे पहले आगरा में डॉ. शाहीन के भाई डॉ. परवेज के संपर्क में आया था। रमीज और परवेज एक व्हाट्सएप ग्रुप में भी जुड़े हुए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रमीज ने इस तरह की गतिविधियों के तहत और कितनी युवतियों को अपने जाल में फंसाया और उनका यौन शोषण किया। अधिकारियों का मानना है कि यदि इस मामले की विवेचना किसी दूसरी एजेंसी को सौंपी जाती है, तो इससे जुड़े कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के बाद पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे जुड़े कई सहयोगी संगठनों पर कड़ा प्रतिबंध लगाया था। यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत की गई थी, क्योंकि पीएफआई पर देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे। अब डॉ. रमीज प्रकरण में पीएफआई का नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियों की चिंता और सतर्कता दोनों बढ़ गई हैं।






