आरोपी डॉ. रमीज के आईआरएफ से कनेक्शन, जाकिर नाइक की भूमिका की जांच तेज
लखनऊ| किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में महिला रेजिडेंट डॉक्टर के यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच में सामने आया है कि आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक के संबंध प्रतिबंधित संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ) से जुड़े हो सकते हैं। यह वही संस्था है, जिसका संचालन विवादित धर्मगुरु डॉ. जाकिर नाइक करता था और जिस पर देश में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराने के आरोपों के चलते प्रतिबंध लगाया गया था। डॉ. जाकिर नाइक फिलहाल विदेश में फरार है और भारत में वांटेड घोषित है।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. रमीज डॉ. जाकिर नाइक और छांगुर जैसे कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था। जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी को जाकिर नाइक से जुड़े लोगों द्वारा शरण दी जा रही है। आईआरएफ पर सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को धर्मांतरण के लिए उकसाने, विदेशी फंडिंग और अवैध गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि इस संस्था के जरिए करीब 800 लोगों का धर्मांतरण कराया गया था, जिस मामले में मुंबई पुलिस पहले भी कुछ गिरफ्तारियां कर चुकी है। जाकिर नाइक का नाम सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं और रमीज के डिजिटल व सामाजिक संपर्कों की गहन छानबीन की जा रही है।
लखनऊ पुलिस ने गुरुवार को पीलीभीत के न्यूरिया कस्बे और उत्तराखंड के खटीमा वार्ड-14 स्थित आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक के पैतृक घरों पर कुर्की की कार्रवाई के तहत नोटिस चस्पा किया। करीब एक घंटे चली इस कार्रवाई के बाद पुलिस टीम लौट गई। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप व सोशल मीडिया कनेक्शन की जांच की जाएगी।
इस बीच उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “डॉ. रमीज को पाताल से भी खोजकर निकाला जाएगा।” उन्होंने कहा कि आयोग की सक्रियता के चलते पीड़िता को न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और दोषी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
केजीएमयू की विशाखा समिति ने भी अपनी जांच पूरी कर ली है। समिति की रिपोर्ट में डॉ. रमीज को यौन उत्पीड़न का दोषी पाया गया है। इसके आधार पर केजीएमयू प्रशासन आरोपी का दाखिला निरस्त कराने के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) को पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर आरोपी रेजिडेंट को निलंबित किया जा चुका है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद आरोपी बयान देने के लिए समिति के सामने उपस्थित नहीं हुआ।
हालांकि, विशाखा समिति की जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी की मदद करने वाले कुछ लोगों की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। केजीएमयू के कुछ प्रोफेसरों पर भी आरोपी को संरक्षण देने के आरोप लगे हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब आरोपी के साथ-साथ उसके सहयोगियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।






