लखनऊl केजीएमयू की महिला रेजीडेंट डॉक्टर के यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास के मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। आरोपी रेजीडेंट डॉक्टर डॉ. रमीज मलिक के माता-पिता को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि रमीज धर्मांतरण गिरोह के सरगना बलरामपुर निवासी छांगुर से प्रभावित था। छांगुर के पकड़े जाने के बाद से ही रमीज मानसिक रूप से परेशान चल रहा था।
पुलिस के अनुसार, डॉ. रमीज की छांगुर से मुलाकात एक मौलवी के माध्यम से हुई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि वही मौलवी पीड़िता पर धर्मांतरण के लिए दबाव बना रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए चौक पुलिस ने खुफिया एजेंसियों को भी इसकी जानकारी दे दी है। पुलिस बीते एक वर्ष के दौरान रमीज की गतिविधियों, उसके आवागमन और संपर्कों की गहन जांच कर रही है।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। रमीज के विदेश में बैठे कुछ लोगों से भी संपर्क में रहने के प्रमाण सामने आए हैं। आशंका जताई जा रही है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी विदेश फरार हो गया है। हालांकि पुलिस को उसकी अंतिम लोकेशन लखनऊ की ही मिली थी, लेकिन इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया, जिससे वर्तमान लोकेशन का पता नहीं चल पा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि रमीज ने साजिश के तहत पहले भी एक महिला का धर्मांतरण कराया था। इस मामले में पुलिस पीलीभीत निवासी निकाह कराने वाले काजी सैय्यद जाहिद हसन की तलाश कर रही है। माना जा रहा है कि काजी की गिरफ्तारी के बाद पूरे धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि काजी ने अब तक कितनी महिलाओं का धर्मांतरण कराया है। वहीं धर्मांतरण के गवाह शारिक खान की तलाश में भी दबिश दी जा रही है।
आरोपी की अब तक गिरफ्तारी न होने को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी रमीज को हिरासत में नहीं लिया गया, जबकि वह उस समय केजीएमयू परिसर में मौजूद था। इसी दौरान वह भूमिगत हो गया। इसको लेकर कई संगठनों ने नाराजगी जताई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी डॉ. रमीज मलिक अन्य धर्म की 15 महिला रेजीडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था। कॉल डिटेल में सामान्य ड्यूटी समय के बाद भी लंबी बातचीत के प्रमाण मिले हैं। केजीएमयू में चर्चा है कि रेजीडेंट डॉक्टर का धर्मांतरण कराने पर मोटी रकम मिलती थी। सूत्रों के मुताबिक एक डॉक्टर के धर्मांतरण के बदले 15 लाख रुपये तक दिए गए, जबकि नॉन-मेडिकोज के लिए यह रकम कम बताई जा रही है। इसी लालच में आरोपी एक साथ कई रेजीडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था।


