फर्रुखाबाद।कायमगंज की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था अनुगूंज के तत्वावधान में एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन सी पी गेस्ट हाउस कायमगंज में सफलता के शिखर चूमते हुए संपन्न हुआ।
गीतकार पवन बाथम की वाणी वंदना से प्रारंभ हुए इस कवि सम्मेलन में सोनभद्र से पधारे डॉक्टर कमलेश राजहंस ने अपने विचार कुछ इस तरह रखे,
शिशिर की सर्द रातें बाढ़ में डूबा हुआ जीवन,
गर्म लू के थपेड़ों से मेरी सांसे दहकती हैं।
हसीनों के पसीनो से तेरी बगलें महकती हैं
हमारे खून से इस देश की सरहद महकती हैं।।
मध्य प्रदेश से हास्य व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर डॉक्टर शंकर सहर्ष ने हास्य की रचनाओं से हंसाते हंसाते श्रोताओं को राम मय बना दिया
रगों रगों में खून राम का राम दिलों की धड़कन हैं ।
जीव जीव में राम समाये राम बिना क्या जीवन है।
लखनऊ से आए ओज के जाने-माने हस्ताक्षर प्रमोद द्विवेदी ने अपने विचार इस तरह रखे ,
जिसने दुनिया में लहराया शौर्य वीरता का परचम।
इस भारत को दास बनाए बोलो इतनी किसमें दम।।
रायबरेली से पधारे गीतकार गोविंद गजब ने बेटी पर अपना गीत प्रस्तुत कर वातावरण को मार्मिक बनाया।
व्यंग वाण छोड़ते हुए के के अग्निहोत्री ने श्रोताओं को बहुत देर तक हंसाया। नेताओं पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा़़़ तुम मुझसे क्या प्यार करोगे,तुम तो कारोबार करोगे। इसकी टोपी उसके सर पर ऐसा कितनी बार करोगे।।
शायरा नूरी परवीन कानपुर ने गजल प्रस्तुत करके वातावरण को प्रेममय बना दिया । उनका एक मुक्तक देखें,
प्यासी है मेरी आंखें दीदार जरूरी है,
बेचैन है दिल मेरा तेरा प्यार जरूरी है।
जो बात है दिल में वह होठों पर आने दो ,
चाहत है तो चाहत का इजहार जरूरी है।।
डॉ सुनील सिद्धार्थ ने कई चुटीले व्यंग पढ़कर वाहवाही लूटी।
मधुर स्वर की धनी वाराणसी से आई विभा शुक्ला ने गीत गजल पढ़कर श्रोताओं को मंत्र मुग्थ कर दिया,
गमों के साए ढलते जा रहे हैं,
पुराने दिन बदलते जा रहे हैं।
बुलंदी पर जो देखा पक्षियों को,
मेरे भी पर निकलते जा रहे हैं।।
श्रोताओं के आग्रह पर गीतकार पवन बाथम ने श्रृंगार के मुक्तक और एक गीत पढ़कर समा बांधा। प्रमोद कुमार सनोद और अंकित शर्मा ने प्रभावी काव्य पाठ किया। रचनाकारों का माल्यार्पण और शाल्यार्पण के साथ-साथ ब्लॉक प्रमुख श्रीमती अनुराधा दुबे, नगर पालिकाअध्यक्ष डॉक्टर शरद गंगवार ,पूर्व विधायक अमर सिंह खटीक ,पूर्व नगर पालिकाअध्यक्ष सुनील कुमार चक और अरुण दुबे का माला एवं शाल से सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में तमाम गणमान्य व्यक्तियों ने प्रारंभ से अंत तक कविताओं का आनंद लिया । अध्यक्षता डॉक्टर कमलेश राजहंस ने और संचालन गोविंद गजब ने किया। अंत में पूर्व विधायक ने सभी का आभार व्यक्त किया।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में गूंजे राष्ट्रवाद के स्वर, डटे रहे श्रोता


