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Saturday, February 21, 2026

कस्तूरबा विद्यालय में घोटाले की बू: छात्राओं के हक पर डाका, बाजार से कई गुना दाम पर खरीद

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फर्रुखाबाद। जनपद के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्राओं की शिक्षा, सुविधा और पोषण के लिए जारी सरकारी बजट के दुरुपयोग की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि विद्यालय प्रशासन द्वारा बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर सामान खरीदकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है, जिससे छात्राओं के अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार विद्यालय में फर्नीचर, स्टेशनरी, खाद्यान्न, साफ-सफाई सामग्री तथा अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से ऊंची कीमतों पर की गई है। सबसे अधिक अनियमितता इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद में सामने आने की बात कही जा रही है। वाशिंग मशीन, एलईडी टीवी, कंप्यूटर और प्रिंटर जैसे उपकरण बाजार दर से कई गुना अधिक मूल्य पर खरीदे जाने का दावा किया जा रहा है। वहीं, बिलों में ब्रांडेड और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री दर्शाई गई, जबकि वास्तविकता में सस्ते और लोकल उत्पाद उपयोग में लाए जाने की चर्चा है।
शासन की गाइडलाइन के अनुसार छात्राओं के हित में प्रमाणित और गुणवत्ता युक्त कंपनियों की सामग्री खरीदना अनिवार्य है, ताकि आवासीय विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसके बावजूद कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर खरीद प्रक्रिया को मनमाने तरीके से संचालित किया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है।
खाद्यान्न व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि स्टॉक रजिस्टर में दर्ज खाद्यान्न की मात्रा और वास्तविक उपलब्धता में अंतर पाया जा रहा है। सत्यापन प्रक्रिया पर भी उंगलियां उठ रही हैं और कमीशनखोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह छात्राओं के पोषण और स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जाएगा।
जानकारों का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग का तरीका अक्सर एक जैसा होता है—पहले मनचाहे आपूर्तिकर्ता तय किए जाते हैं, फिर बढ़ी हुई दरों पर बिल तैयार कर भुगतान निकाला जाता है और कीमत का अंतर कथित तौर पर बांट लिया जाता है। कागजों में सब कुछ नियमों के अनुरूप दिखा दिया जाता है, जबकि जमीनी स्थिति अलग होती है।
स्थानीय अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने खरीद प्रक्रिया, निविदा विवरण, बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर और गुणवत्ता परीक्षण की जांच कराने की अपील की है। वहीं, विद्यालय के जिला समन्वयक बालिका शिक्षा (डीसी) सुनील कुमार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जब इस संदर्भ में बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सारी खरीद जेम पोर्टल से होती है अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो जांच की जाएगी।

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